भारत में पुनर्जागरण में हेनरी विवियन डिरोजियो के कार्यों को संक्षिप्त में बताइए

भारतीय इतिहास में, 19 शताब्दी के तीसरे और चौथे दशक में बंगाल के बुद्धिजीवियों में उग्रवादी प्रवृत्ति का जन्म हुआ था। इस आन्दोलन को ‘यंग बंगाल ‘आन्दोलन’ के नाम से जाना जाता है, जिसके प्रमुख संगीतकार हेनरी विवियन डेरोजियो थे।

हेनरी विवियन डिरोजियो का जीवन

हेनरी विवियन डिरोजियो एक एंग्लो-इंडियन थे जो 1826-1831 तक हिन्दू कॉलेज में इतिहास के प्राध्यापक रहे। उन्होंने फ्रांस की महान क्रांति से अत्यधिक प्रभावित थे और इस प्रभाव को भारतीय समाज में सुलझाने का कारण बने।

भारत में पुनर्जागरण में हेनरी विवियन डिरोजियो के कार्य:-

शिक्षा में परिवर्तन

हेनरी विवियन डिरोजियो ने अपने विद्यार्थियों को विवेकपूर्ण और मुक्त ढंग से सोचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी आधारों की प्रामाणिकता की जाँच करने, समानता और स्वतंत्रता से प्रेम करने तथा सत्य की पूजा करने के लिए अपने विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

विचारशीलता और समाज

हेनरी विवियन डिरोजियो ने नारी अधिकारों के पक्के हिमायती थे और उन्होंने इस मुद्दे पर विचार किया। उनका दृष्टिकोण समाज के सभी वर्गों को एकसमान दृष्टिकोण से देखने का था, जिससे समाज में सामंजस्य और समरसता बनी रहे।

कृषि समृद्धि

हेनरी विवियन डिरोजियो ने किसानों से संबंधित प्रश्नों को बहुत गहराई से अध्ययन किया और उनकी बढ़ती हुई आत्म-समर्पण की बजाय, अपने कृषि प्रणालियों में सुधार के लिए आगे बढ़ने का समर्थन किया।

विरोध और सुधार

हेनरी विवियन डिरोजियो ने अपनी परिचर्चा में विधवाओं का उद्धार और मूर्तिपूजा तथा सभी प्रकार की रूढ़िवादिता का विरोध किया। उन्होंने समाज को विकास और सुधार की दिशा में प्रेरित किया और नए विचारों को स्वीकार करने की आवश्यकता की बात की।

इस प्रकार, हेनरी विवियन डिरोजियो ने भारतीय समाज में एक नई सोच का परिचय किया और उनके आदर्शों ने समाज में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान किया। उनके विचारों ने नए सोचने की राह दिखाई और उनके कार्यों ने भारतीय समाज को पुनर्जागरण की दिशा में प्रेरित किया।