भारत में अलगाववादी प्रवृत्तियों के लिए जिम्मेदार विभिन्न कारकों पर चर्चा करें।

भारत में अलगाववादी प्रवृत्तियों के लिए जिम्मेदार विभिन्न कारक:- 

सामाजिक संरचना:- भारत की विषमतापूर्ण सामाजिक संरचना ने भी राष्ट्रीय एकीकरण के मार्ग में महत्वपूर्ण समस्या खड़ी कर दी है. भारत में कोई ब्राह्मण है, तो कोई हरिजन, कोई शिया है, तो कोई सुन्नी. इन सभी आधारों पर लोग एक दूसरे से बँटे हुए हैं. वे अपने क्षेत्र वर्ग जाति सम्प्रदाय के हित की बातें सोचते हैं. इनके लिए राष्ट्रीय एकीकरण एक सुनने और सुनाने वाले शब्द से ज्यादा कुछ नहीं है. स्पष्टतः यह कहा जा सकता है कि भारतीय सामाजिक संरचना राष्ट्रीय एकीकरण के विपरीत स्वरूप वाली है, जिसे राष्ट्र निर्माण या राष्ट्रीय एकीकरण की तरफ मोड़ने का प्रयास नहीं किया जा रहा है|

आर्थिक-असंतुलन:- भारत में राष्ट्रीय एकीकरण की महत्वपूर्ण समस्या के रूप में आर्थिक असंतुलन को भी रखा जा सकता है. देश के विभिन्न भागों के बीच पाया जाने वाला आर्थिक असंतुलन और आर्थिक शोषण पारस्परिक मतभेदों को बढ़ावा देने में प्रभावकारी रहा है. भारत में कुछ राज्यों की आर्थिक स्थिति काफी अच्छी है, जबकि कुछ राज्य आर्थिक स्तर पर काफी पिछड़े हुए हैं, यह आर्थिक असंतुलन राष्ट्रवाद की भावना को कमजोर करता है. पिछड़े हुए क्षेत्र के लोग अपने-आपको राष्ट्र निर्माण की धारा से अलग समझते हैं और कभी भी व्यापक राष्ट्रीय हित की बात नहीं सोचते हैं. भारत में आर्थिक असंतुलन को बढ़ाने में सियासी भूमिका भी महत्वपूर्ण है. राजनीतिक दल के लोग अपनी व्यक्तिगत और क्षेत्रगत स्वार्थ से प्रभावित होकर भारत में आर्थिक असंतुलन को बढ़ावा देते हैं.

क्षेत्रवाद:- व्यक्ति या समूह की इस भावना को क्षेत्रवाद के नाम से जानते हैं और इस क्षेत्रवाद ने भारत में राष्ट्रीय एकीकरण को बुरी तरह से प्रभावित किया है. आज भारत के लोग यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि हम बिहारी हैं, तुम पंजाबी हो, हम राजस्थानी हैं तुम गुजराती. उस संकीर्ण भावना ने पूरे भारत में अलगाववाद, भूमि पुत्र अवधारणा, आतंकवाद आदि को पैदा कर दिया है.

गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी:- भारत में राष्ट्रीय एकीकरण के मार्ग में गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी महत्वपूर्ण समस्या के रूप में खड़ी है. एक गरीब और बेरोजगार अपने पेट के लिए हर कुछ करता है. जो माँ पेट के लिए अपने बच्चे को ‘ऊँट दौड़’ हेतु बेच सकती है वह क्या राष्ट्र विरोधी कदम नहीं उठा सकती. जाहिर है कि गरीबी, बेरोजगारी और अशिक्षा ने भारतीय जनता को राष्ट्र निर्माण की धाराओं से अलग करके रख दिया है और गरीब बेरोजगार व अशिक्षित अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी करने को तैयार है.

अन्य समस्याएँ:- ऊपर वर्णित राष्ट्रीय एकीकरण की समस्याओं के अलावा अन्य कई समस्याएँ भी हैं, जो भारतीय राष्ट्र निर्माण को प्रतिकूल रूप में प्रभावित कर रही है. उदाहरण के तौर पर राजनीतिक व प्रशासनिक भ्रष्टाचार, निरंकुश व अप्रतिबद्ध नौकरशाही, पक्षपातपूर्ण मीडिया, आतंकवाद और नक्सलवाद |