जूही की कली किसकी रचना है

जूही की कली छायावादी कवि सूर्य कांत त्रिपाठी निराला की रचना है

जूही की कली नयी कविता के प्रथम अंक में प्रकाशित हुई थी। निरालाजी का कहना था कि ‘जूही की कली’ तो उन्होंने सन् 1916 में ही लिख डाली थी । यद्यपि ‘जूही की कली’ का कथ्य रीतिकालीन-सा है तथापि अप्रस्तुत- विधान, चित्रमयी भाषा और लाक्षणिक वैचित्र्य एवं छन्द-मुक्ति आदि सभी दृष्टियों से यह कविता हिन्दी काव्य में एक स्पष्ट मोड़ की सूचक है ।