रीति और शैली का घनिष्ठ संबंध ज्ञात कीजिए रीति अथवा शैली का महत्व बताइए

रीति और शैली का घनिष्ठ संबंध :- 

रीति और शैली अभिव्यक्ति की पद्धति है, जिसका अंग्रेजी पर्याय Style है।

विशिष्ट अर्थ में रीति और शैली में बहुत अंतर नहीं है।

शैली विचारों का परिधान है, यह उपयुक्त शब्दावली का प्रयोग है या कहें कि अभिव्यक्ति का ढंग शैली है।

शैली भाषा का व्यक्तिगत प्रयोग है।

शैली के दो मूल तत्त्व हैं- 1. व्यक्ति-तत्व 2. वस्तु-तत्त्व।

डॉ. सुशील कुमार डे रीति और शैली को एक कि मानते हैं।

वे कहते हैं कि रीति में व्यक्तित्व का प्रभाव है जब तक शैली का मूल आधार ही व्यक्ति तत्त्व है।

इधर डॉ. नगेन्द्र’ की मान्यता है कि यूरोप के आचार्यों द्वारा निर्दिष्ट शैली के तत्त्व नामांतर से रीति के तत्त्वों में ही अंतर्भूत हो जाते हैं अथवा रीति के तत्त्वों का शैली-तत्त्वों में ही अंतर्भाव हो जाता है।

दोनों समान हैं-केवल नामभेद है।

रीति का महत्व:- रीति को आचार्य वामन ने काव्य की आत्मा सिद्ध करने का प्रयत्न किया। इसे आत्मा न भी मानें तो भी इतना तो मानना ही पड़ेगा कि इसका महत्त्व कम नहीं है। इसमें काव्य के बहिरंग तत्त्व के स्वतंत्र मूल्य की स्थापना ही अधिक है। रीति में रागतत्त्व, बुद्धितत्त्व, कल्पना तथा शैलीतत्त्व का अंतर्भाव हो जाता है।