मोती व्यर्थ लुटाने वालों पंक्ति में मोती से क्या आशय है

यह पंक्ति पद्मश्री व पद्मभूषण प्राप्त कवी “गोपाल दास नीरज ” द्वारा लिखित कविता “जीवन नहीं मरा करता है ” से लिया गया है |

इस पंक्ति “मोती व्यर्थ लुटाने वालों” में उन्होंने व्यर्थ के पश्चाताप को दर्शाने का प्रयत्न किया है |

वें लिखते है की छोटी सी हार या असफलता से हमें निराश नहीं होना चाहिए , जीवन में हमारे लिए बहुत कुछ है एक छोटी हार से हमारा जीवन समाप्त नहीं हो जाता |