मान्यखेत को राष्ट्रकूट राज्य की राजधानी किसने बनाई थी

राष्ट्रकूट राजवंश का समय भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय था, जिसने दक्षिण भारतीय क्षेत्र में अपने प्रभाव की गहरी छाप छोड़ी। मान्यखेत, जो कि राष्ट्रकूट राज्य की राजधानी थी, ने इस वंश को एक महत्वपूर्ण स्थान पर स्थापित किया।

राजवंश का इतिहास

राजवंश का इतिहास मुख्य रूप से उसके शासकों द्वारा खुदवाये गए बहुसंख्यक अभिलेखों से ज्ञात होता है। इन अभिलेखों ने हमें राष्ट्रकूट साम्राज्य के संप्राप्तिकर्ताओं के सामरिक, सांस्कृतिक, और आर्थिक क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण कार्यों का विवरण प्रदान किया है।

राष्ट्रकूट साम्राज्य की नींव

राष्ट्रकूट साम्राज्य की नींव लगभग 752 ई. में दन्तिदुर्ग ने की ओर रखी गई थी। इस राजधानी ने आपसी राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास की प्रोत्साहना की और दक्षिण भारतीय इतिहास में एक सांगड़ी का कारण बनी।

राष्ट्रकूट लेखों का विवरण

  1. दन्तिदुर्ग के एलोरा था सामन्तगढ़ के ताम्र पत्राभिलेख: यह अभिलेख बताता है कि दन्तिदुर्ग कैसे राष्ट्रकूट साम्राज्य की राजधानी बनी और इसने कैसे एलोरा को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र बनाया।
  2. गोविन्द III के राधनपुर, वनि दिन्दोरी था बड़ौदा के लेख: इस लेख से हम जान सकते हैं कि गोविन्द III ने कैसे बड़ौदा को अपने आर्थिक समृद्धि का केंद्र बनाया और राष्ट्रकूट साम्राज्य के विकास में अपना योगदान दिया।
  3. अमोघवर्ष का सृजन अभिलेख: अमोघवर्ष के द्वारा सृजन किए गए अभिलेख से हम उसके सांस्कृतिक और कला के प्रति आकर्षण को समझ सकते हैं, जिसने राष्ट्रकूट साम्राज्य को एक सांस्कृतिक अद्वितीयता प्रदान की।
  4. इन्द्र III का कमलपुर अभिलेख: इस अभिलेख से हम जान सकते हैं कि इन्द्र III ने कैसे कमलपुर को एक प्रमुख शहर बनाया और उसने कैसे शौर्य और साहस से भरी जीवन जीता।
  5. गोविन्द IV के काम्बे तथा संगली के लेख: यह लेख बताता है कि गोविन्द IV ने कैसे काम्बे और संगली को विकसित किया और उन्होंने कैसे इन स्थानों को आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्धि प्रदान की।
  6. कृष्ण III के कोल्हापुर, देवली तथा कर्नाट के लेख: इन लेखों से हम जान सकते हैं कि कृष्ण III ने कैसे कोल्हापुर, देवली, और कर्नाट को विकसित किया और उन्होंने कैसे इन स्थानों में अपने साम्राज्य की स्थापना की।

इस प्रकार, राष्ट्रकूट लेखों का विवरण इस राजवंश की महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके योगदान को स्पष्ट रूप से प्रकट करता है। इन अभिलेखों के माध्यम से हम राष्ट्रकूट साम्राज्य के समृद्धि और विकास की कहानी सुन सकते हैं।

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