भारतीय संस्कृति की निरंतरता से आप क्या समझते है

प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक भारत में कई विदेशी सांस्कृतियों का आगमन हुआ, लेकिन वे सब भारतीय संस्कृति के समक्ष प्रभावशाली सिद्ध नहीं हुई। भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा गुण दूसरे संस्कृति को अपने में समाहित करने का है। इसलिए आज भी हमारी संस्कृति पूर्व की तरह सशक्त बनी हुई है। भविष्य में भी हमारी संस्कृति पूर्व की तरह विकास के पथ पर गतिमान बनी रहेगी और समाज में अद्वितीय बनी रहेगी।

  • भारतीय संस्कृति हमें ‘जीवन जीने की कला’ को सिखाती है कि किस प्रकार लोगों को सादा जीवन जीने और उच्च विचार रखने में विश्वास करना चाहिए। हमारे जीवन में आध्यात्मिकता का पुट है। प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक लोगों के रहन-सहन में प्राचीन परम्परा एवं रीति रिवाजों को देखा जा सकता है। उदाहरण के लिए, सिंधु घाटी के लोग जल की पवित्रता, वृक्षपूजा एवं पशुओं के पूजा को महत्त्व देते थे।
  • वर्तमान समय में देश के लोग एवं हमारी सरकार भी इस तरफ ध्यान दे रही है। अर्थात हमारी सरकार नदियों की सफाई, वृक्षारोपरण एवं पर्यावरण के माध्यम से पशुओं के संरक्षण पर जोर दे रही है। भारतीय संस्कृति ने इस्लामी संस्कृति को भी अपने में समाहित कर लिया है, क्योंकि भारतीय संस्कृति का यह सबसे बड़ा गुण है कि वह दूसरे संस्कृति से प्रभावित होकर अपने मूल उद्देश्यों से विमुख नहीं है।
  • भारतीय समाज बदलते सांस्कृतिक परिदृश्य के अनुसार अपने में परिवर्तन करने में सक्षम रहा है। इसलिए आज भी हमारी संस्कृति प्रगतिशील है, जिसके फलस्वरूप हमारा समाज मजबूत स्थिति में है, हमारे देश में विविधता में एकता एवं विश्व बंधुत्व की भावना प्रबल है।
  • भारतीय संस्कृति आधुनिकीकरण की युग में विश्व की कई महत्वपूर्ण संस्कृतियों को अपने में समाहित करके पहले की तुलना में और मजबूत बन गयी है। इससे हमारी संस्कृति में गतिशीलता बनी हुई है, जो प्रगति की निशानी है। भारतीय संस्कृति में निरंतरता एवं परिवर्तन के तत्व एक साथ समन्वित होकर गतिशील हैं, जो इसकी उत्तरजीविता को अद्वितीय बनाते हैं।
  • भारतीय समाज धर्मनिरपेक्ष समाज है, देश में विभिन्न सप्रदायों परम्पराओं एवं रीति-रिवाजों को मानने वाले लोग हैं, सभी को अपने- अपने धर्म के अनुसार आचरण करने की आजादी है। हमारे संविधान में उल्लेख है कि राज्य का कोई धर्म नहीं होगा। देश में सभी धर्मों के मध्य सह-अस्तित्व बना हुआ है।

निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि भारतीय संस्कृति समाज के सभी वर्गों को आपस में जोड़ने तथा प्रेम पूर्वक रहने के लिए प्रेरित करती है। हमारे देश के निवासियों में वसुधैव कुटुम्बकम की भावना है। देश में विविध संस्कृतियों का संगम है।