भारतीय राष्ट्रपति को संसद का अंग क्यों माना जाता है

भारतीय संविधान में केन्द्रीय विधानमण्डल को ‘संसद’ (Parliament ) की संज्ञा दी गई है जिसमें राज्यसभा बड़ा, लोकसभा छोटा सदन है। अनुच्छेद 79 के अनुसार, संसद का अर्थ है- राष्ट्रपति, राज्यसभा तथा लोकसभा। इसी को राष्ट्रपति सहित – संसद कहते हैं। राष्ट्रपति किसी सदन का सदस्य नहीं हो सकता, लेकिन वह संसद का अभिन्न अंग है क्योंकि वह सत्र बुलाता है, सत्र का उद्घाटन करता है तथा संसद से पास किए गए बिलों को अपनी अनुमति देकर उन्हें कानून का रूप प्रदान करता है। उसकी अनुशंसा से लोकसभा में धन विधेयक पेश हो सकता है। वह सत्रावसान करता है तथा किसी समय लोकसभा को भंग कर सकता है। उल्लेखनीय बात यह है कि हमारी संसद ब्रिटिश संसद की तरह प्रभुता सम्पन्न नहीं है। यह अमरीकी कांग्रेस की तरह गैर- प्रभुता सम्पन्न भी नहीं है। इसमें दोनों का विचित्र मिश्रण देखा जा सकता है। “इसे ब्रिटिश नमूने के अनुसार अपनाया गया है, लेकिन कुछ हद तक अमेरिका का न्यायिक समीक्षा का सिद्धान्त उसके ऊपर आरोपित किया गया है।”1