प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों के अंतर की व्याख्या करें।

प्राथमिक क्षेत्रक – जब प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके किसी वस्तु का उत्पादन किया जाता है, तो इसे प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि कहा जाता है। अधिकांश प्राकृतिक उत्पाद कृषि, डेयरी, मत्स्यन और वनों से प्राप्त करते हैं। इसलिए इस क्षेत्रक को कृषि एवं सहायक क्षेत्रक भी कहा जाता है।

द्वितीयक क्षेत्रक – द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के अंतर्गत प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के द्वारा अन्य रूपों में परिवर्तित किया जाता है। यह क्षेत्रक क्रमशः संबंधित विभिन्न प्रकार के उद्योगों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहा जाता है।

तृतीय क्षेत्रक – प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक के अतिरिक्त आर्थिक गतिविधियों की एक तीसरी श्रेणी भी है, जो तृतीयक क्षेत्रक के अंतर्गत आती है। ये गतिविधियाँ प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक के विकास में मदद करती हैं। ये गतिविधियाँ स्वतः वस्तुओं का उत्पादन नहीं करती हैं, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में सहयोग या मदद करती हैं।