परमाणु ऊर्जा में भारतीय कार्यक्रम के जनक हैं

परमाणु ऊर्जा: होमी जहांगीर भाभा का अद्भुत योगदान

परिचय

परमाणु ऊर्जा में भारतीय कार्यक्रम के प्रवर्तक

परमाणु ऊर्जा में भारतीय कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा ने अपने अद्वितीय योगदान के साथ देश को विश्व स्तर पर गर्वित किया है। उन्होंने 1944 ई. में भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में पहले कदम की ओर प्रेरित किया, जिसका परिणाम आज हमारे नेतृत्व में उन्नत ऊर्जा स्वतंत्रता है।

प्रारंभ

तात्कालिक समय में परमाणु ऊर्जा के शोध का आरंभ

होमी जहांगीर भाभा ने 1945 ई. में टाटा को परमाणु ऊर्जा पर शोध के लिए आर्थिक सहायता की माँग की, जिसके परिणामस्वरूप टाटा ने 1945 में टाटा फण्डामेंटल रिसर्च सेंटर की स्थापना की। भाभा वहां शोध कार्य करते रहे और उनका संगठन भारतीय विज्ञान के नेतृत्व में था।

सरकारी योजना

परमाणु ऊर्जा आयोग और विभाग की स्थापना

सशक्त और स्वतंत्र भारत के लिए एक सकारात्मक मोड़ के रूप में, सरकार ने 1948 में परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) की स्थापना की। इसके पश्चात्, 1954 ई. में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) का गठन हुआ, जिसने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में प्रगति को नेतृत्व किया।

बार्क: अनुसंधान केंद्र का गठन

1967 ई. में होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु के बाद, विभाग का नाम बदलकर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ‘बार्क’ (BARC) रखा गया। यह केंद्र अब भी भारत के ऊर्जा अनुसंधान के क्षेत्र में नेतृत्व कर रहा है और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुका है।

उत्कृष्टता की दिशा में

भाभा का योगदान और उत्कृष्टता

होमी जहांगीर भाभा का योगदान और उनकी उत्कृष्टता ने भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक शक्तिशाली खिलाड़ी बना दिया है। उनके शोध और नेतृत्व के कारण ही भारत आज एक स्वतंत्र ऊर्जा राष्ट्र के रूप में चमक रहा है।

एक शक्तिशाली भविष्य की दिशा

भारतीय परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में होमी जहांगीर भाभा का अद्भुत योगदान और उनके संघर्ष ने देश को एक शक्तिशाली भविष्य की दिशा में अग्रणी बना दिया है। उनकी उपलब्धियों ने भारत को विश्व स्तर पर मान्यता दिलाई है और उनकी बेहतरीन दिशा ने हमें एक ऊर्जा स्वतंत्र भविष्य की दिशा में बढ़ने में मदद की है।