‘जीवन साथी’ का चुनाव मिट्टी के ढेलों पर छोड़ने के कौन-कौन से फल प्राप्त होते हैं?

वैदिक काल में ‘जीवन साथी’ का चयन करने के लिए वर अपनी भावी वधू के पास मिट्टी के ढेले ले जाता था। मिट्टी के ढेले विभिन्न स्थानों की मिट्टियों से निर्मित होते थे। इसमें गोशाला, वेदि, खेत, मसान इत्यादि स्थानों की मिट्टियों से बने ढेले होते थे। वर को मिट्टी के ढेले के स्थान का पता होता था लेकिन कन्या को नहीं वह इनमें से किसी एक ढेले का चयन करती थी।
वस्तुतः मिट्टी के ढेलों के चयन में अंधविश्वास की प्रवृत्ति थी । लोग इन ढेलों से प्राप्त फल की विवेचना करते थे। माना जाता था कि यदि कन्या ने गोशाला की मिट्टी से बने ढेले का चयन किया, तो उसकी संतान ‘ पशुधन की स्वामी’ होगी। यदि कन्या वेदि की मिट्टी से बने ढेले का चयन करती तो माना जाता कि संतान ‘वैदिक पंडित’ होगी तथा खेत की मिट्टी से बने ढेले का चयन करने वाली कन्या की संतान जमींदार होगी। मसान की मिट्टी से बने ढेले का चयन ‘अशुभ’ होता था और ऐसी कन्या से विवाह नहीं होता था।