चंगेजखान कि सैन्य उपल्ब्धियाँ का वर्णन कीजिए ?​

चंगेज़ खान ने अपने जीवन का अधिकांश भाग युद्धों में व्यतीत किया और मृत्युपर्यन्त (1227 ई०) युद्धों में लगा रहा। निःसंदेह उसकी सैनिक उपलब्धियाँ आश्चर्यजनक थीं। अपनी अपूर्व बुद्धिमत्ता तथा अद्भुत संगठन प्रतिभा का परिचय देते हुए उसने पशुपालक एवं शिकार – संग्राहक कबीले को कुशल सैनिकों में बदल दिया। परिणामस्वरूप उसे हर मोर्चे पर सफलता मिली।
1. चंगेज़ खान ने स्टेपी क्षेत्र की युद्ध शैली में आवश्यकतानुसार अनेक परिवर्तन एवं सुधार किए। परिणामस्वरूप मंगोलों की रणनीति एक प्रभावशाली रणनीति बन गई।
2. चंगेज़ खान ने अपनी घुड़सवार सेना में मंगोलों और तुर्की दोनों को सम्मिलित किया। मंगोल और तुर्क दोनों ही कुशल घुड़सवार थे। इनके घुड़सवारी कौशल ने उसकी सेना को अत्यधिक गतिवान बना दिया।
3. अपने दैनिक जीवन में जंगलों में पशुओं का शिकार करते-करते शिकार – संग्राहकों ने तीरंदाजी में अद्भुत कुशलता प्राप्त कर ली थी। चंगेज़ खान ने उनके इस कौशल से लाभ उठाते हुए कुशल तीरंदाजों की सैन्य टुकड़ियों का संगठन किया। तीरंदाजों की ये कुशल घुड़सवार सैन्य टुकड़ियाँ तेजी से आगे बढ़ने और कहीं भी उथल-पुथल मचा सकने में समर्थ थीं।
4. स्टेपी प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों ने घुड़सवारों को फुर्तीला और तेज़ बना दिया था। वे बड़ी तेज गति से यात्रा करते थे | और अचानक आक्रमण करके शत्रु को आश्चर्यचकित कर देते थे।
5. मंगोल घुड़सवार सैनिकों को समीपवर्ती भू-भागों तथा मौसम की जानकारी देने के प्रयास किए गए। इससे उन्हें हर मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों में लड़ने का अच्छा अनुभव हो गया।
6. मंगोल अपने अभियान शीत ऋतु में प्रारंभ करते थे। वे शत्रु के शिविरों और नगरों में प्रवेश करने के लिए बर्फ से जमी हुई नदियों का प्रयोग राजमार्गों के समान करते थे ।
7. चंगेज़ खान घेराबन्दी यंत्रों और नेफ्था बमबारी के महत्त्व को भली-भाँति समझता था। वह यह भली-भाँति जानता था कि इनके अभाव में प्राचीरों से आरक्षित किलों पर विजय प्राप्त करना दुष्कर था। अतः उसने अपनी सैन्य टुकड़ियों को इनके प्रयोग में कुशल बनाने का प्रयास किया।
8. चंगेज़ खान के इंजीनियरों द्वारा निर्मित हल्के चल-उपस्करों ने उसके सैन्य अभियानों की सफलता में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।