ओस क्या है?

ओस एक प्रकार की वाष्प है जो वायुमंडल में बिखर जाती है और छोटी बूंदों के रूप में पृथ्वी पर गिरती है। यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो वायुमंडल में पानी की बूंदों को बनाती है और वातावरण को सुखा-वर्षा की शक्ति प्रदान करती है।

ओस बनने की प्रक्रिया

ओस बनने की प्रक्रिया जलवाष्प के संचय से सीधा संबंधित है। जब हवा में 100% आर्द्रता होती है, तो हवा संतृप्त हो जाती है और तरल पानी बनना शुरू हो जाता है। ओस बिंदु वह तापमान है जिस पर हवा संतृप्त होती है और पानी की बूंदों में संघनित होने लगती है।

संतृप्त होने के बाद का प्रक्रिया

संतृप्त होने के बाद हवा को ठंडा करने के बाद, संक्षेपण शुरू होता है। 100% सापेक्षिक आर्द्रता के बाद, पानी की बूंदें संघनित हो जाएंगी। यदि तापमान 32 डिग्री फ़ारेनहाइट से ऊपर है, तो ओस, कोहरा, बादल आदि होंगे।

तरल रूप में प्रकट होने के लिए आवश्यकता

तरल रूप में प्रकट होने के लिए, कुछ को द्रवीभूत करने की आवश्यकता होती है। यह ओस को प्राकृतिक रूप से विकसित होने का साधन करता है और वायुमंडल में संतृप्त होकर बारिश का स्रोत बनता है।