अपवर्तनांक किसे कहते हैं

अपवर्तनांक की परिभाषा:

निर्वात् में प्रकाश के वेग (जो वायु में इसके वेग के लगभग बराबर होता है) और दूसरे माध्यम में प्रकाश के वेग के अनुपात को माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं |

अपवर्तनांक ज्ञात करने का सूत्र है :

अपवर्तनांक = वायु में प्रकाश का वेग/दूसरे माध्यम में प्रकाश का वेग

अपवर्तनांक को सामान्यतया ग्रीक अक्षर ‘ μ ‘ (म्यू) से प्रदर्शित किया जाता है |

पानी का अपवर्तनांक 1.33 होता है और काँच का 1.50 होता है

स्नेल का नियम के अनुसार :- स्नेल का नियम या अपवर्तन का नियम बताता है कि दिए गए माध्यमों के युग्म में दिए गए तरंग दैर्ध्य के प्रकाश के लिए अपवर्तन कोण (r) की ज्या और आपतन कोण (i)की ज्या का अनुपात स्थिर होता है।

μ=sin(i)/sin(r) = स्थिरांक

जहाँ  μ= पहले माध्यम के संबंध में दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक।

ऊपर से, यह स्पष्ट है कि अपवर्तन कोण की ज्या को अपवर्तन कोण की ज्या द्वारा विभाजित करने पर वह अपवर्तनांक के बराबर होता है, जिसे स्नेल का नियम कहा जाता है।

निरपेक्ष अपवर्तनांक (Absolute Refractive Index) : यदि पहला माध्यम जिसमें आपतित किरण है, निर्वात हो तो अनुपात sin(i)/sin(r) को दूसरे माध्यम (जिसमें अपवर्तित किरण है) का निरपेक्ष अपवर्तनांक कहते हैं |

सापेक्ष अपवर्तनांक (Relative Refractive Index) : माध्यम 1 (जिसमें आपतित किरण है) के सापेक्ष माध्यम 2 (जिसमें अपवर्तित किरण है) का अपवर्तनांक sin(i)/sin(r) होता है |