‘पाँचवीं रिपोर्ट’ क्या थी?

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      ‘पाँचवीं रिपोर्ट’ जमींदारों और रैयतों की अर्जियाँ, भिन्न-भिन्न जिलों के कलेक्टरों की रिपोर्ट सांख्यिकीय तालिकाएँ तथा बंगाल और मद्रास के अधिकारियों द्वारा लिखी टिप्पणियाँ थीं।

      कंपनी के बंगाल में स्थापित होने के साथ से ही इंग्लैंड में उसके क्रिया-कलापों पर नजर रखी जाने लगी थी। इंग्लैंड में बहुत से व्यापारिक समूह उसके भारत-चीन व्यापार पर एकाधिकार का विरोध करते थे और राजनीतिक समूह उनकी पैरवी करते थे। कंपनी के कुशासन और अव्यवस्थित प्रशासन के विषय में प्राप्त सूचनाओं पर इंग्लैंड में खूब चर्चाएँ हुआ करती थीं तथा समाचार-पत्र कंपनी के अधिकारियों द्वारा किये गये अत्याचार – भ्रष्टाचार और लोभ-लालच की घटनाओं और नीतियों को व्यापक रूप से छापते थे । अत: कंपनी को भारत सरकार ने नियंत्रित करने के लिये अनेक अधिनियम बनाये तथा नियमित रूप से भारत के प्रशासन की रिपोर्ट भेजने के लिये बाध्य किया गया तथा कंपनी के कामकाज की जाँच करने के लिये कई समितियाँ बनायी गयीं।

      पाँचवीं रिपोर्ट ऐसी ही एक रिपोर्ट थी जो एक ‘प्रवर समिति द्वारा तैयार की गयी थी। इस रिपोर्ट पर ब्रिटिश संसद में गंभीर वाद-विवाद चलते रहे। इसमें ग्रामीण बंगाल में औपनिवेशिक शासन के बारे में, परंपरागत जमींदारी सत्ता के पतन के बारे में आलोचनात्मक रिपोर्ट थी ।

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