1835 वियना संधि की तीन विशेषताए लिखिए

    प्रश्नकर्ता yoginath
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    1835 वियना संधि की तीन प्रमुख विशेषताए –

    (i) फ्रांस में बूढे वंश को पुनः सत्ता में स्थापित कर दिया गया।

    (ii) फ्रांस ने उन इलाकों को खो दिया जिन पर कब्जा उसने नेपोलियन के अधीन किया गया था।

    (iii) नीदरलैण्ड राज्य को उत्तर में तथा पीडमॉण्ट में जेनोआ को दक्षिण में जोड़ दिया गया।

    (iv) पश्चिम में प्रशा को नया शासित राज्य बना दिया गया। |

    (v) इटली पर ऑस्ट्रिया का नियंत्रण स्थापित कर दिया गया।

    (vi) पूर्व में रूस को पोलैण्ड का एक हिस्सा दिया गया तथा प्रशा को सैक्सनी का एक हिस्सा दिया गया।

    1835 वियना संधि– वियना कांग्रेस सम्मेलन नेपोलियन के पतन के पश्चात् युरोप के विजयी राष्ट्र ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में 1815 में एकत्र हुए।

    यह सितंबर 1814 से जून 1815 को वियना में आयोजित किया गया था ।

    इसकी अध्यक्षता ऑस्ट्रियाई चांसलर ड्यूक मैटरनिक ने की ।

    इसके प्रतिनिधियों ने 1815 की वियना संधि तैयार की जिसका उद्देश्य उन कई सारे बदलावों को खत्म करना था, जो नेपोलियाई युद्धों के दौरान हुये थे। और यूरोप में पुन: उसी व्यवस्था को स्थापित करना था, जिसे नेपोलियन के युद्धों और विजयों ने अस्त-व्यस्त कर दिया था।

    ऑस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिक की पहल पर वियना में कांग्रेस सम्मेलन बुलाया गया।

    मेटरनिक घोर प्रतिक्रियावादी था। इस सम्मेलन में चार बड़े सदस्य थे- ग्रेट ब्रिटेन, रूस, ऑस्ट्रिया एवं प्रशा जैसी यूरोपीय शक्तियों ने भाग लिया।

    इसे वियना कांग्रेस सम्मेलन कहा जाता है।

    इस सम्मेलन में वियना की संधि हुई जिसका मुख्य उद्देश्य यूरोप में शांति स्थापना करना तथा राजनीतिक व्यवस्था में लाये गये परिवर्तनों को समाप्त करना था।

    चांसलर ड्यूक मैटरनिक व्यवस्था का उद्देश्य पुरातन व्यवस्था की पुनर्स्थापना करना था।

    अतः इस सम्मेलन के माध्यम से नेपोलियन युग का अंत तथा मैटरनिक युग की शुरुआत हुई।

    बता दे की वर्ष 1985 में भी एक वियना संधि हुयी थी जिसके बारे में हम छोटी जी जानकारी नीचे दे रहे है |

    वियना संधि 1985 ओज़ोन क्षरण के मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय समझौते हेतु अंतर-सरकारी वार्ता वर्ष 1981 में प्रारंभ हुई।

    यह ओज़ोन परत के संरक्षण के लिए एक बहुपक्षीय पर्यावरण समझौता है।

    इस पर 1985 के वियना सम्मेलन में सहमति बनी और 1988 में यह लागू किया गया ।

    196 देशों के साथ-साथ यूरोपीय संघों द्वारा इसे मंजूर किया जा चुका ।

    जिसमें ओज़ोन संरक्षण से संबंधित अनुसंधान पर अंतर-सरकारी सहयोग, ओज़ोन परत का सुव्यवस्थित तरीके से निरीक्षण, क्लोरो फ्लोरो कार्बन गैसों की निगरानी और सूचनाओं के आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की गई।

    इस सम्मेलन में मानव स्वास्थ्य और ओज़ोन परत में परिवर्तन करने वाली मानवीय गतिविधियों की रोकथाम करने के लिये प्रभावी उपाय अपनाने पर सदस्य देशों ने प्रतिबद्धता व्यक्त की।

    वियना संधि, ओजोन परत की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के लिए एक ढांचे के रूप में कार्य करता है।

    हालांकि इसमें CFC के इस्तेमाल के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी न्यूनता के लक्ष्य शामिल नहीं हैं, ओज़ोन (Ozone- layer) परत रिक्तीकरण का मुख्य कारण रासायनिक कारक हैं।

    नोट :- यदि आप प्रतियोगी परीक्षा की तयारी कर रहे है तो प्रशन के अनुसार उत्तर का चयन करे की वियना संधि 1835 के बारे में पूछा गया है या 1985 के बारे में |

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