हॉकी का जादूगर किसे कहा जाता है

    प्रश्नकर्ता rameshwar
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

     हॉकी का जादूगर मेजर ध्यानचन्द को कहा जाता है

     मेजर ध्यानचन्द –  हॉकी के जादूगर ‘ मेजर ध्यानचंद’ का जन्म 29 अगस्त, 1905 ई. में इलाहाबाद में हुआ था

    ध्यानचंद सन् 1922 ई. में सेना में भर्ती हुए और चार वर्ष बाद न्यूजीलैण्ड दौरे पर गई भारतीय हॉकी टीम के लिए गोलों की झडी लगाकर अपने को हॉकी के इतिहास में अंकित कराया.

    सन् 1928 में जब भारतीय हॉकी टीम पहली बार  ओलम्पिक खेलने मेजर ध्यानचन्द एम्सटर्डम गई, तो आज की चैम्पियन आस्ट्रेलिया को 6-0 से और नीदरलैण्ड को 3-0 से पीटने के अलावा भारत ने बेल्जियम, डेनमार्क और स्विटजरलैण्ड को परास्त कर पहला ओलम्पिक स्वर्ण पदक जीता.

    इस विजय पर मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी विजार्ड‘ के खिताब से अलंकृत किया गया,

    सन् 1936 के बर्लिन ओलम्पिक में भारतीय हॉकी टीम ने ध्यानचंद के नेतृत्व में शानदार प्रदर्शन किया. इस मैच में स्वयं हिटलर मौजूद था ध्यानचन्द के करिश्मे से जर्मनी को बुरी पराजय झेलनी पड़ी.

    जिस हिटलर को तोप-तलवारें नहीं डिगा पाई थीं, उसे ध्यानचंद के चमत्कारी खेल कौशल ने गिड़गिड़ाने के लिए विवश कर दिया था. लाख प्रलोभन के बावजूद ध्यानचंद ने हिटलर का प्रस्ताव ठकरा दिया था और भारतीय फौज व हॉकी की सेवा में अपना सर्वस्व लगा दिया.

    मेजर ध्यानचंद ‘दद्दा‘ के नाम से भी जाने जाते हैं, उनका जीवन एक आदर्श खिलाड़ी और देशभक्त का जीवन दर्शन रहा है. इनकी कुल 11 संतानें हुईं. मेजर ध्यानचंद हर प्रकार के छल-प्रपंच और दिखावे से दूर रहे और आजीवन सादगी को अपनाया.

    मेजर ध्यानचंद को सन् 1956 ई. में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. 3 दिसम्बर, 1979 को लम्बी बीमारी के कारण आपका निधन हो गया.

    खेल में योगदान के लिए  मेजर ध्यानचद के जन्म दिवस ’29 अगस्त’ को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसका शुरूआत प्रथम बार 29 अगस्त, 1995 को हुई था.

     

     

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