हम पंछी उन्मुक्त गगन के कविता का अर्थ

    प्रश्नकर्ता meeso
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    हम पंछी उन्मुक्त गगन के कविता का अर्थ पंक्ति में कवि ने पक्षियों के माध्यम से स्वतन्त्रता के महत्व को बताया है

    हम पंछी उन्मुक्त गगन के’ कविता प्रसिद्ध कवि ‘शिवमंगल सिंह सुमन‘ की रचना हैं। जिसमें उन्होंने स्वतन्त्रता के महत्व को बताया है।

    जिसे उन्होंने पिंजरे में बंद पंक्षियों के भावों के माध्यम से प्रस्तुत किया है। पक्षी अपने मन के दुखद भावों को प्रस्तुत करते कहते हैं- कि हम खुले आकाश में विचरन करने वाले पक्षी है। हम पिंजरे में गा नहीं सकते।

    पिंजरा चाहे सोने का हो, उसकी तीलियों से टकराकर तो हमारे कोमल पंख टूट जाएंगे। हम बहते जल को पीकर अपनी प्यास बुझाने वाले हैं। पिंजरे में बंद होकर तो हम भूखे-प्यासे मर जाएंगे।

    सोने की कटोरी में रखी मैदा की अपेक्षा कड़वी नीम की निबौरी खाना अधिक बेहतर है। हम गुलामी के इस पिंजरे में तो अपनी स्वतन्त्र उड़ान को भूल जाएंगे। अब तो पेड़ की ऊँची शिखरत्तम टाहनी पर बैठना सपना मात्र रह गया है।

    हमारे जो अरमान थे नीले आकाश में स्वतन्त्र उड़ान भरना एवं लाल किरणों को अपनी चोंच से अनार के दानों के रूप में चुगना यह सब इच्छाएँ अब पूरी नहीं हो सकेगी।

    पक्षी अपनी इच्छा को व्यक्त करते कहते है कि यदि हम स्वतन्त्र होते तो असीमित आकाश में उड़ते या तो आकाश से हमारा मिलन हो जाता या फिर हमारे प्राणों का अन्त हो जाता।

    पक्षी कहते हैं कि चाहें हमें घोसला न दो, टहनी का सहारा भी तोड़ डालो, लेकिन यदि परमात्मा ने हमें पंख दिए हैं तो हमें स्वतन्त्र उड़ने दो, हमारी उड़ान में रुकावट न डालो। क्योंकि स्वतन्त्रता से अधिक मूल्यवान कुछ नहीं होता। कवि स्वतन्त्रता के अमूल्य अर्थ को प्रतिपादित करता है।

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