सूर का भ्रमरगीत विप्रलमभ श्रृंगार का उत्कृष्ट उदहारण

    प्रश्नकर्ता pairi
    Participant
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    उत्तरकर्ता Shivani
    Participant
    • श्रृंगार रस एक शक्तिशाली आध्यात्मिक उपकरण है जो मनुष्य की सभी भावनाओं को व्यक्त करने में आपकी सहायता कर सकता है।
    • जबकि सूरदास के श्रृंगार में दोनों पक्षों के संयोग और असंगत चित्रण हैं, सूरदास का दिमाग ज्यादातर अलगाव के चित्रण पर केंद्रित है।
    • सूरदास का भ्रमरगीत गोपियों के वियोग के लिए हृदय विदारक व्यंजना का काव्य है।
    • आचार्य शुक्ल के अनुसार सूरदास के स्थान पर साहित्य में इन स्थितियों के वर्णन के आधार पर अनेक प्रकार के भेद मिलते हैं।
    • दुनिया में मौजूद वियोग की गहराई से कवि का हृदय द्रवित हो जाता है।मायावी गीत में घटनाओं के बीच कोई अंतर नहीं है।
    • कहानी बस इतनी है कि कृष्ण से अलग होने पर उद्धव गोपियों और राधा को निर्गुण ब्रह्म और योग का सन्देश लाने आते हैं और गोपियाँ अपने वियोग का सारा कष्ट उद्धव पर भ्रम के बहाने निकाल देती हैं।
    • गोपियों के अलगाव की व्याख्या करने के लिए सूरदास विभिन्न रूपकों का उपयोग करते हैं।
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