संचारी भाव किसे कहते हैं? किन्हीं चार संचारी भावो के नाम लिखिए

    प्रश्नकर्ता Ajit GAMING
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    उत्तरकर्ता Quizzer Jivtara
    Participant

    मन के चंचल या अस्थिर विकारों को संचारी भाव कहते हैं।

    स्थायी भाव के बदलने पर ये भाव परिवर्तित होते रहते हैं, इनका नाम ‘संचारी भाव’ रखे जाने के पीछे यही कारण भी है। संचारी भावों को व्यभिचारी भाव भी कहा जाता है।

    उदाहरण – शकुंतला के प्रति रति भाव के कारण उसे देखकर दुष्यंत के मन में मोह, हर्ष, आवेग आदि जो भाव उत्पन्न होंगे, उन्हें संचारी भाव कहेंगे।

    संचारी भावों की संख्या तैंतीस (33) बताई गई है।

    इनमें से मुख्य संचारी भाव हैं- शंका, निद्रा, मद, आलस्य, दीनता, चिंता, मोह, स्मृति, धैर्य, लज्जा, चपलता, आवेग, हर्ष, गर्व, विषाद, उत्सुकता, उग्रता, त्रास आदि।

     

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