विटामिन कितने प्रकार के होते हैं

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    उत्तरकर्ता Quizzer Jivtara
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    विटामिन दो प्रकार के होते हैं :-

    1. वसा में घुलनशील विटामिन (Fat Soluble Vitamins)- विटामिन A, D, E और K, ये विटामिन वसा में घुलनशील, लेकिन जल में अघुलनशील हैं।
    2. जल में घुलनशील विटामिन (Water Soluble Vitamins)- विटामिन B कॉम्प्लेक्स (12 विटामिनों का समूह) तथा विटामिन C जल में घुलनशील विटामिन हैं।

    1. वसा में घुलनशील विटामिन :-

    विटामिन A (Vitamin A, or Retinol):- विटामिन A एक तरह का ऐल्कोहॉल है। यह आँख की रेटिना के लिए विशेष कार्य करता है, अतः इसे ‘रेटिनॉल’ के नाम से भी जाना जाता है। यह साधारण तापक्रम पर नष्ट नहीं होता, लेकिन ऑक्सीकरण की क्रिया से नष्ट हो जाता है । जन्तु-जगत में यह विटामिन कॉड लीवर ऑयल, लीवर, मछली, अण्डे, मक्खन, दूध आदि से प्राप्त किया जाता है, जबकि वनस्पति स्रोतों में इसे गाजर, हरी पत्तेदार भाजी से प्राप्त किया जा सकता है।

    कार्य :- (i) कम रोशनी में व रात को देखने के लिए विटामिन A आवश्यक होता है। इसकी कमी से व्यक्ति को रात व कम रोशनी में दिखाई नहीं देता।
    (ii) विटामिन A का प्रमुख कार्य त्वचा, उसकी सभी ग्रंथियों, नलिकाओं तथा शरीर के सभी तंत्रों . (Systems) की श्लेष्मा कला (Mucous Membrane) को स्वस्थ बनाये रखना है।
    (iii) यह नरम ऊतकों (Soft tissues) व अस्थि कंकाल (Skeletal) और दाँतों के विकास के लिए आवश्यक है।

    विटामिन D (Vitamin D, Calciferol):- आहारीय साधनों में विटामिन D मछली के यकृत के तेल से तथा कुछ मात्रा में मक्खन, क्रीम, अण्डे का पीला भाग, यकृत, मछली, मिल्क पाउडर व दूध से भी प्राप्त होता है। सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणें विटामिन D का सबसे अच्छा स्रोत है।

    कार्य:- (i) विटामिन D का सबसे महत्वपूर्ण कार्य एक अत्यावश्यक हॉर्मोन्स (कैल्सिफेरॉल) का निर्माण करना है। यह यकृत व किडनी के द्वारा तैयार किया जाता है तथा इसके द्वारा वृद्धि व विकास तथा दाँतों व हड़ियों का उचित मिनरलाइजेशन (Mineralization) होता है।
    (ii) विटामिन D आँतों में कैल्सियम व फॉस्फोरस के शोषण में सहायक होता है।

    विटामिन E (Vitamin E Tocopherol ) :- गेहूँ के अंकुर का तेल इसका सबसे अच्छा स्रोत है । इसका अतिरिक्त अन्य अनाजों के अंकुर के तेल में भी पाया जाता है । अन्य स्रोतों में अण्डे का पीला भाग, दूध की वसा, मक्खन, माँसल पदार्थ, गिरियाँ अनाज, हरे वनस्पतिज पदार्थ तथा वनस्पति तेल (सोयाबीन, कॉर्न, काटन सीड) प्रमुख हैं ।

    कार्य:- (i) यह कोशिकाओं की दीवारों को वसा के परऑक्सीडेशन से उत्पन्न परॉक्साइड्स (Paroxides) तथा मुक्त मूलन (Free Radicals) से सुरक्षित रखता है।
    (ii) ऑक्सीकरण करने वाले कारकों से लाल रक्त कणिकाओं की रक्षा करता है व इस प्रकार से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं के विघटन को रोकता है।
    (iii) कार्बन टेट्राक्लोराइड (CCI4) का यकृत पर विषैला प्रभाव पड़ता है। इस प्रभाव से यह विटामिन, यकृत को सुरक्षित करता है।

    विटामिन K (Vitamin K, Phylloquinone):- हरी पत्तेदार सब्जियों विशेषकर पालक व पत्तागोभी, के पत्रियों में यह विटामिन पाया जाता है । फलों, अनाजों, दूध व दूध से बने पदार्थों, मांस में यह कम मात्रा में पाया जाता है। यह मुख्यतः दो रूपों में पाया जाता है- विटामिन K1 तथा K2,  विटामिन K1, हरे पत्तों में उपस्थित रहता है, जबकि K2, आँतों में जीवाणुओं की क्रिया से बनता है।

    कार्य:- यह एक ‘एन्टीहिमोरेजिक’ विटामिन है, अर्थात् रक्त स्राव को रोकता है। यह प्रोथ्रॉम्बीन Prothrombine) तथा अन्य प्रोटीन जो कि रक्त के जमने के लिए आवश्यक होते हैं, उनके संश्लेषण के लिए आवश्यक होता है।

    2. जल में घुलनशील विटामिन :-

    विटामिन C (Vitamin C, Ascorbic Acid):- यह आँवला, अमरूद, नीबू, संतरा, मौसम्बी व अन्य – खट्टे रसीले फलों (Citrus fruits) में पाया जाता है। टमाटर, हरी मिर्च, हरी पत्तेदार सब्जियों में भी पाया जाता है |अंकुरित अनाजो एवं दालों में इसकी मात्रा बढ़ जाती है, जबकि पके खाद्य पदार्थों में इसकी मात्रा घट जाती है |

    कार्य-(i) ऐस्कॉर्बिक ऐसिड (Ascorbic acids), मनुष्यों एवं पशुओं के आँतों से लोहे के अवशोषण को बढ़ाता है। यह फेरिक आयन (Fett’) को फेरस आयन (Fet’) में अवकृत (Reduce) कर देता है, जिससे अवशोषण आसान हो जाता है।

    (ii) घावों को भरने में भी सहायक होता है, क्योंकि यह जोड़ने वाले ऊतकों के निर्माण में सहायक होता

    (iii) यह हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) के निर्माण में व रक्त जमने की क्रिया में भी सहायक होता है। iv) विटामिन C एन्टीऑक्सीडेन्ट की तरह भी कार्य करता है।

    (iv) विटामिन C एन्टीऑक्सीडेन्ट की तरह भी कार्य करता है।

    (v) यह संक्रमण का शरीर में विरोध करता है । अतः इसे एन्टीइन्फेटिव विटामिन भी कहा जाता है ।

    (vi) विषों (Toxic) को निष्प्रभावी (detoxify) करने में भी सहायक होता है।
    (vii) यह एपिनेफ्रीन (Epinephrine) हॉर्मोन के निर्माण में तथा ऐड्रीनल ग्रंथि से निकलने वाले संक्रमण प्रतिरोधक स्टीरॉइड्स के निर्माण में भी सहायक होता है।

    विटामिन B कॉम्प्लेक्स (Vitamin B Complex):- इसके अन्तर्गत B कॉम्प्लेक्स समूह के 12 विटामिन आते है। इन्हें एक साथ B कॉम्प्लेक्स समूह में इसलिए रखा जाता है, क्योंकि ये प्रकृति में एक साथ पाये जाते हैं तथा इनमें से एक की कमी होने पर अन्य सदस्यों की कमी भी देखी जाती है।

    कार्य :- ये विटामिन शरीर की चयापचय से सम्बन्धित क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं, क्योंकि ये ‘को-एन्जाइम’ (Coenzyme) की तरह कार्य करते हैं।

    विटामिन B1 (Vitamin B], Thiamine) :- यह विटामिन वनस्पतिज व जन्तु-जगत में बहुतायत में उपस्थित रहता है। इसके समृद्ध साधनों में, अंकुरित गेहूँ, राइस पॉलिशींग आदि है। इसके अलावा यह सम्पूर्ण अनाजों, फलियों, गिरियों व तिलहन में भी पाया जाता है।

    कार्य :- थायमिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य ‘को-एन्जाइम’ के रूप में है। इसके द्वारा पायरुविक अम्ल डीकाब्रोक्सीलेशन (Decarboxylation) होता है। इस तरह से कार्बोहाइड्रेट के चयापचय में थायमिन महत्वपूर्ण है। साथ ही यह प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट्स से वसा के निर्माण में भी मदद करता है |

    विटामिन B2 (Vitamin B2, Riboflavin):- यह प्रमुख रूप से यीस्ट, दूध, पनीर, यकृत, अण्डे व हरी पत्तेदार सब्जियों में उपस्थित रहता है। दालों में व लीन मीट (lean meat) में भी यह काफी मात्रा में उपस्थित रहता है।

    कार्य- इस विटामिन का भी प्रमुख कार्य ‘को-एन्जाइम’ बनाना है। ये को-एन्जाइम फ्लवोप्रोटीन एन्जाइम से सम्बद्ध रहते हैं तथा ये शरीर में बहत-सी ऑक्सीकरण उपकरण क्रियाओं को सम्पन्न करते हैं ।

    विटामिन B4 (Vitamin Ba, Niacin):- नियासिन के समृद्ध स्रोतों में प्रमुख है, यीस्ट, लीन मीट, मछली, मुर्गी का मांस, राइस पॉलिशिंग, मूंगफली, सम्पूर्ण अनाज, फलियाँ आदि। शरीर में ट्रिप्टोफेन अमीनो अम्ल से भी नियासिन बन सकता है।

    कार्य- नियासिन से बनने वाले दो ‘को-एन्जाइम’ (NAD, NADP) बॉयलॉजीकल ऑक्सीडेशन (Biological Oxidation) में महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। त्वचा, आँत, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) के सुचारु रूप से कार्य करने के लिए यह विटामिन आवश्यक होता है।

    विटामिन B6 (Vitamin B6, Pyridoxine) :- यह विटामिन विस्तृत रूप से वनस्पतिज एवं जन्तु-जगत में पाया जाता है। इसके अच्छे साधनों में मांसल पदार्थ विशेषकर यकृत, यीस्ट, सम्पूर्ण अनाज, गेहूँ के अंकुर, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, तिलहन, गिरियाँ, अण्डा, दूध आदि प्रमुख हैं।

    कार्य- यह बहुत से एन्जाइम के लिए को-एन्जाइम की तरह कार्य करता है, जो कि कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा प्रोटीन के चयापचय से सम्बन्धित होते हैं । यह ट्रांसएमीनेशन, डीएमीनेशन, डीसल्फरेशन तथा डीकार्बोक्सिलेशन की क्रियाओं में आवश्यक एन्जाइम के लिए को-एन्जाइम की तरह कार्य करता है।

    फोलिक ऐसिड (Folic acid)- यीस्ट, वृक्क, यकृत तथा हरी पत्तेदार सब्जियाँ, विशेषकर पालक इसके उत्तम साधन हैं। फलियों में तथा सम्पूर्ण अनाजों में भी यह पाया जाता है।

    कार्य- (i) यह लाल रक्त कणिकाओं की परिपक्वता के लिए आवश्यक है।

    (ii) विभिन्न अमीनो अम्लों की चयापचय तथा न्यूक्लिक अम्ल के संश्लेषण में इससे बने हुए एन्जाइम आवश्यक होते हैं।

    (iii) प्यूरीन तथा पिरिमिडीन श्रृंखला के संश्लेषण के लिए इससे बने को-एन्जाइम आवश्यक होते हैं।

    (iv) इसका सबसे प्रमुख कार्य एक-कार्बन वर्ग (One Carbon group) को एक यौगिक से दूसरे यौगिक में स्थानान्तरित करना है।

    विटामिन B12 (Vitamin B12, Cyanocobalamin):- यह जन्तु प्रोटीन पदार्थों में अधिकता से पाया जाता है। यकृत व वृक्क इसके समृद्ध साधन हैं । दूध, अन्य मांसल पदार्थों, चीज (Cheese), अण्डे तथा मछली में भी पर्याप्त मात्रा में उपस्थिति रहता है।

    कार्य:- (i) सभी तरह की कोशिकाओं विशेषकर आमाशय, आंत्र पथ, अस्थिमज्जा तथा तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के सामान्य चयापचय के लिए ‘कोबाल ऐमीन’ (विटामिन B12) आवश्यक होता है।
    (ii) ये न्यूक्लिक अम्ल के चयापचय में भी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

    (ii) यह लाल रक्त कणिकाओं की परिपक्वता के लिए आवश्यक होता है।

    बायोटीन (Biotin)- यह यकृत, वृक्क, अण्डे के पीले भाग, मूंगफली व कुछ सब्जियों में पाया जाता है।
    कार्य- यह बहुत से कार्बोक्सिलेटिंग एन्जाइम के लिए को-एन्जाइम की तरह कार्य करता है। कार्बोहाइड्रेट्स तथा वसा दोनों के चयापचय में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

    अन्य B कॉम्प्लेक्स विटामिन- B कॉम्प्लेक्स ग्रुप के अन्य सदस्यों में कोलीन (Choline), इनोसिटॉल (Inositol) तथा पैरा अमीनो बेन्जोइक अम्ल आते है। ये मनुष्यों के लिए विटामिन नहीं माने जाते । कोलीन कम उम्र के अन्य प्राणियो के लिए आवश्यक माना जाता है। इनोसिटॉल कुछ यीस्ट की वृद्धि के लिए आवश्यक होता है जबकि पैरा अमीनो बेन्जोइक अम्ल निम्न श्रेणी के जन्तुओं की वृद्धि के लिए आवश्यक माना जाता है।

    विटामिन P (Vitamin P, Bioflavonoids) :- यह नीबू, नारंगी तथा अन्य फलों में भी पाया जाता है। फलों के रसों की अपेक्षा छिलके में अधिक पाया जाता है।

    कार्य- (i) यह रक्त केशिकाओं (Capillaries) से रक्त स्राव को रोकता है।

    (ii) यह एक ऐन्टि-ऑक्सीडेन्ट भी है, जो विटामिन C के ऑक्सीडेटिव डिस्ट्रक्शन को रोकता है

    (iii) यह स्क र्वी रोग’ से होने वाले रक्त स्राव को कम करता है।

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