लैंथेनाइड संकुचन क्या है

    प्रश्नकर्ता bijju
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    उत्तरकर्ता jivtaraQuizzer
    Participant

    लैन्थेनाइड श्रेणी में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ-साथ (La→ Lu) परमाणु अथवा आयनों के आकार या त्रिज्या में क्रमागत रूप से कमी होती जाती है। आकार अथवा त्रिज्या की इस कमी को लैन्थेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) कहते हैं।

    लैन्थेनाइड तत्वों में La का आकार सबसे बड़ा तथा Lu का सबसे छोटा होता है।

    लैन्थेनाइड संकुचन का कारण-

    लैन्थेनाइड तत्वों में नया आने वाला इलेक्ट्रॉन 4f ऑर्बिटल में प्रवेश करता है, जिससे यह नया आने वाला इलेक्ट्रॉन परमाणु के आकार बढ़ाने में कोई योगदान नहीं कर सकता।

    f-ऑर्बिटल के आकार तथा मध्यवर्ती इलेक्ट्रॉनिक कोश (5s2p6d1) के कारण नये आने वाले इलेक्ट्रॉन का परिरक्षण प्रभाव (shielding effect) बहुत कम होता है।

    अतः नये इलेक्ट्रॉन के आने से नाभिकीय आवेश बढ़ता जाता है जिससे बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन के लिए नाभिक का आकर्षण सतत बढ़ता है और तत्वों एवं आयनों के आकार (त्रिज्या) में संकुचन होता है, क्योंकि नाभिकीय आवेश को सन्तुलित करने वाला परिरक्षण प्रभाव उतना नहीं बढ़ता है। इस प्रकार La3+से Lu3+ तक आयनिक त्रिज्या 1.06 A से 0.85 A तक घटती है।

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