राष्ट्रवाद किसे कहते हैं​

    प्रश्नकर्ता nishi
    Participant
Viewing 1 replies (of 1 total)
  • उत्तर
    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    राष्ट्र ऐतिहासिक रूप से निर्मित लोगों का एक समुदाय है। एक राष्ट्र की पहचान सर्वप्रथम वहाँ के लोगों की सामान्य भौतिक परिस्थितियों, जैसे-सीमाएँ, आर्थिक जीवन, उस समुदाय की भाषा, मनोवैज्ञानिकता और कुछ राष्ट्रीय चरित्र व प्रवृत्तियों जो उनकी राष्ट्रीय सांस्कृतिक विशेषता के रूप में अभिव्यक्त होती हैं , राष्ट्रवाद  कहते हैं ।​

    राष्ट्र किसी मानव समुदाय का सबसे विशाल रूप है जो पूँजीवादी संरचना के साथ ही साथ दिखाई देता है। एक देश में सामन्ती विभाजन की समाप्ति, एक अंचल में आर्थिक सम्बन्धों का सुदृढ़ीकरण और स्थानीय बाजारों का एक राष्ट्रीय बाजार में विलय, एक राष्ट्र के घनीभूत होने के आर्थिक आधार के रूप में काम करता है।

    इस अवधि में बुर्जुआ ही राष्ट्रों की नेतृत्वकारी शक्ति होता है और उस राष्ट्र के सामाजिक-राजनीतिक और धार्मिक पहलुओं पर अपनी निश्चित छाप छोड़ जाता है। जैसे-जैसे बुर्जुआ राष्ट्र का विकास होता है, उनके बीच में सामाजिक मतभेद तीक्ष्ण होते जाते हैं और वों के बीच मतभेद स्पष्ट हो जाते हैं।

    बुर्जुआ इन मतभेदों अन्तर्विरोधों को छुपाने और राष्ट्रों के बीच अन्तर्विरोधों को बढ़ाने का प्रयास करता है। बुर्जुआ वर्ग राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय स्वार्थपरता की वकालत करता है। राष्ट्रों के बीच मनमुटाव और नफरत, राष्ट्रों के बीच झगड़े, पूँजीवाद का अपरिहार्य परिणाम है।

    बर्जआ राष्ट्रवाद के मुकाबले सर्वहारा वर्ग, सर्वहारा अन्तर्राष्ट्रवाद की नीति और सिद्धान्त प्रस्तुत करता है। पूँजीवाद की समाप्ति के साथ-साथ राष्ट्रवाद की अवधारणा में रेडिकल परिवर्तन होता है।

    पुराने बुर्जुआ राष्ट्र, मजदूर वर्ग और मेहनतकश किसानों के साथ संशय कायम कर नये वर्ग आधार पर नये सोशलिस्ट राष्ट्रों में रूपान्तरित हो जाते हैं।

    सोशलिस्ट राष्ट्रों के बीच आपसी शत्रुता समाप्त हो जाती है। राष्ट्रों के बीच पुराने अविश्वास के अवशेष धीरे-धीरे समाप्त होते हैं और राष्ट्रों की जनता के बीच मित्रता निरन्तर विकसित होती है।

    अर्थ व प्रकृति (Meaning and Nature)
    राष्ट्र, राष्ट्रीयता तथा राष्ट्रवाद जैसे शब्दों की कोई मानक परिभाषा प्रस्तुत करने में यह कठिनाई है कि या तो उनका प्रयोग पर्याय के रूप में या फिर विविध प्रसंगों में विभिन्न रूपों में किया जाता है

    परन्तु सभी प्रकार की विभिन्नताओं के बावजूद, कुछ गहरी मनोवैज्ञानिक और संवेगात्मक धारणाओं के पुंज अर्थात् एक जीवित रखने वाली सामान्य राजनीतिक चेतना के घटक को ही मौलिक महत्त्व प्रदान किया जाता है।

    अधिकांश स्थितियों में, राष्ट्रवाद को मातृभूमि से प्रेम अथवा देशभक्ति का समरूपी माना जाता है। राष्ट्र एकता व एकत्व के प्रबल बन्धन से बँधे लोगों का समूह है

    जो प्रभुसत्ता सम्पन्न हो अथवा जो विदेशी जुए से मुक्ति पाने के लक्ष्य के लिए संघर्ष कर रहा हो । यही कारण है कि विदेशी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए पराधीन लोगों का संघर्ष उनके राष्ट्रीय आन्दोलन (national movement) का इतिहास बन जाता है।

    राष्ट्रवाद के रूप

    (Forms of Nationalism) यह कहना ठीक है कि राष्ट्रवाद यूरोप के देशों में पैदा हुआ किन्तु विश्व के अन्य देशों में फैल गया जिससे इसके कई रूप विकसित हुए जिन्हें इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है

    1. उदारवादी राष्ट्रवाद (Liberal Nationalism)-इसका मूल स्थान फ्रांस के रूसो के चिन्तन में देखने को मिलता है जिसने प्रत्यक्ष लोकतन्त्र का गौरवगान किया-ऐसी आदर्श व्यवस्था जिसमें हर नागरिक स्वतन्त्र व समान है तथा सबके हितार्थ ‘सामान्य इच्छा’ ही प्रभुसत्ता का रूप है।

    इसी से प्रेरित होकर फ्रांस के क्रान्तिकारियों ने स्वतन्त्रता, समानता, बन्धुता के नारे लगाये तथा निरंकुश राजतन्त्र को मिटाकर गणतन्त्र स्थापित किया। यह राष्ट्रवाद लोकतन्त्र का समर्थक है और उसे अन्तर्राष्ट्रवाद से मिलाने की कामना करता है।

    इटली के मैजिनी ने युवा इटली के साथ युवा यूरोप की कामना की। अमरीकी राष्ट्रपति विल्सन ने लोकतन्त्र को बचाने की दुहाई देकर प्रथम महायुद्ध में अपने देश को धकेला और फिर 1919 में राष्ट्र संघ (League of Nations) की स्थापना की।

    2. रूढ़िवादी व आक्रामक राष्ट्रवाद (Conservative Nationalism)-यह राष्ट्रवाद अपनी सुस्थापित परम्पराओं से प्रेरणा लेता है तथा अपने आभारों के दृष्टिकोण को संकीर्ण बना देता है। इसके समर्थक अन्य राष्ट्रों को समान महत्व नहीं देते तथा अपने देश में अन्य राष्ट्रों के लोगों के प्रवेश पर रोक लगाना चाहते है।

    सत्ताधारी वर्ग ऐसे कठोर कदम उठाता है ताकि अन्य संस्कृतियों के लोग उनके राष्ट्रवादियों से निकट सम्पर्क न रख सकें। हिटलर ने जर्मनी में नोर्दिक नस्ल वालों का गैरवगान किया तथा बलपूर्वक यहूदियों को देश से निकाला।

    इंग्लैण्ड मैं एनक पवेल ने आन्दोलन चलाया कि गैर-इंगलिश नस्ल के लोगों का उसके देश में प्रवेश रोका जाये। ऐसा राष्ट्रवाद धर्मान्धता व असहनशीलता पैदा करता है जिससे अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में गम्भीर समस्याएँ पैदा होती हैं।

    3. विस्तारवादी राष्ट्रवाद (Expansionist Nationalism)– यह उपर्युक्त रूप से मिलता-जुलता है क्योंकि इसकी जड़ें अंध व आक्रामक राष्ट्रवाद में रखी हुई हैं। यह सैनिक रूप धारण कर लेता है, इसीलिए इसके समर्थक दुनिया के अन्य भागों को जीतकर अपने राज्य में मिलाते हैं।

    अतः यह अन्तर्राष्ट्रवाद की उपेक्षा करके साम्राज्यवाद का समर्थन करता है। हिटलर ने ऑस्ट्रिया का अपहरण किया, फिर चेकोस्लोवाकिया का सुदेशनलैण्ड छीना, फिर पोलैण्ड पर आक्रमण किया। मुसोलिनी ने अफ्रीका के एक निवल व पिछड़े देश (अवीसीनिया) को अपने साम्राज्य में मिलाया।

    इसके मूल इटली के मैकियावली तथा जर्मनी के हीगल व फिकरे के चिन्तन में देखे जा सकते हैं।

     

Viewing 1 replies (of 1 total)
  • इस प्रश्न पर अपना उत्तर देने के लिए कृपया logged in कीजिये