मानव भूगोल के विषय क्षेत्र का वर्णन कीजिए

    प्रश्नकर्ता rameshwar
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    मानव भूगोल के कार्य-क्षेत्र या विषय-क्षेत्र के मुख्य रूप से तीन पहलू सम्मिलित होते हैं

    (i) प्राकृतिक वातावरण के तत्व, (ii) सांस्कृतिक वातावरण के तत्व, (iii) वातावरण समायोजन का अध्ययन।

    (i) प्राकृतिक वातावरण के तत्व – प्राकृतिक वातावरण के अन्तर्गत दो तत्वों का समावेश होता है

    (क) जड़ तत्व – जड़ तत्वों में स्थलाकृतियाँ, जलराशियाँ, जलवायु, मिट्टी तथा खनिज सम्पदा सम्मिलित हैं।

    (ख) चेतन तत्व – चेतन तत्वों में प्राकृतिक वातावरण की जैविक दशाएँ सम्मिलित हैं, जिनमें प्राकृतिक वनस्पति, जीव-जन्तु एवं पशु-पक्षी सम्मिलित हैं।

    उक्त जड़ व चेतन तत्वों के अध्ययन के बिना मानव के क्रियाकलापों को नहीं समझा जा सकता है।

    प्राकृतिक वातावरण के इन तत्वों का मानवीय क्रियाकलापों पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ता है, यह मानव भूगोल के अध्ययन क्षेत्र में सम्मिलित किया जाता है।

    (ii) सांस्कृतिक वातावरण के तत्व – सांस्कृतिक वातावरण का जन्म मानव तथा प्राकृतिक वातावरण की क्रियाओं- प्रतिक्रियाओं के फलस्वरूप होता है। इसके निर्माण में जहाँ एक ओर प्राकृतिक तत्वों का हाथ रहता है, वहीं दूसरी ओर मानव की सामूहिक शक्ति का भी योगदान है।

    प्रो. पी. डब्ल्यू. ब्रायन के अनुसार, “सांस्कृतिक वातावरण मानवीय क्रियाओं तथा भौतिक वातावरण के पारस्परिक सम्बन्धों की अभिव्यक्ति होता है।” सांस्कृतिक वातावरण के तत्वों को तीन पक्षों में विभक्त किया जाता है

    (क) विन्यास रूप – इसमें मानव द्वारा निर्मित खेत,खान, मकान तथा व्यावसायिक स्थल आदि सम्मिलित हैं।

    (ख) चल रूप – इसमें मानव द्वारा निर्मित यातायात के विभिन्न साधन सम्मिलित किये गये हैं।

    (ग) क्रिया रूप – इसमें विभिन्न मानवीय व्यवसाय यथा-कृषि, आखेट, पशुचारण, शिक्षा, सरकार, स्वास्थ्य, उद्योग, व्यापार, धर्म तथा विज्ञान आदि सांस्कृतिक तत्वों को सम्मिलित किया गया है।

    मानव द्वारा अपने प्राकृतिक वातावरण के सहयोग से जीविकोपार्जन करने के क्रिया-कलापों से लेकर उसकी उच्चतम आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किये गये प्रयत्नों तक का अध्ययन मानव भूगोल के विषय-क्षेत्र में आता है।

    (iii) वातावरण समायोजन का अध्ययन – मानव भूगोल के विषय क्षेत्र में यह देखना भी सम्मिलित है कि मानवीय क्रिया-कलापों में विभिन्नताएँ किस प्रकार संसार में वितरित हैं तथा प्राकृतिक वातावरण इन विभिन्नताओं के वितरण को कहाँ तक प्रभावित करता है? साथ ही मानव ने स्वयं को प्राकृतिक वातावरण की इन भिन्नताओं से किस प्रकार समायोजित किया है?

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