मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व की संक्षेप में चर्चा करें

    प्रश्नकर्ता MD
    Participant
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    उत्तरकर्ता Quizzer Jivtara
    Participant

    सामूहिक उत्तरदायित्व-अनुच्छेद-75 (3) में प्रावधानित है कि मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती हैं।

    मंत्रिपरिषद् के संयुक्त उत्तरदायित्व का सिद्धांत इन नियमों में सन्निहित है कि सरकार की प्रत्येक नीति मंत्रिपरिषद् द्वारा अभिस्वीकृत हो और मंत्रिपरिषद का प्रत्येक सदस्य एक-दूसरे के उत्तरदायित्व का वहन करें।

    मंत्रिपरिषद् एक तरफ तो संप्रभु इकाई है और दूसरी तरफ वह विधानपालिका का एक घटक है।

    संपूर्ण मंत्रिपरिषद् एक टीम के रूप में कार्य करती है और मूलभूत नीतियों में एक मत होकर विधानमंडल (व्यवस्थापिका) के प्रति उत्तरदायी होती है।

    मंत्रिपरिषद किसी भी मंत्री के कार्य के लिए व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होती हैं यदि प्रधानमंत्री किसी मंत्री के कार्य से सहमत नहीं है तो वह उस मंत्री से त्यागपत्र देने को कह सकता है।

    भारत में, प्रधानमंत्री को सरकार में एक प्रमुख स्थान प्राप्त है। प्रधानमंत्री के बिना मंत्री परिषद का कोई अस्तित्व नहीं है। प्रधानमंत्री द्वारा पद की शपथ ग्रहण के पश्चात ही मंत्रिपरिषद परिषद अस्तित्व में आती है। प्रधानमंत्री की मृत्यु या त्यागपत्र से मंत्रिपरिषद का स्वतः ही विघटन हो जाता है, परन्तु मंत्री की मृत्यु, बर्खास्तगी या त्यागपत्र से केवल एक मंत्री का पद रिक्त होता है। प्रधानमंत्री एक ओर तो मंत्रिपरिषद में और दुसरी ओर संसद एवं राष्ट्रपति के बीच एक कड़ी का कार्य करता है।

    सामूहिक उत्तरदायित्व मंत्रिपरिषद की एकता के सिद्धांत पर आधारित है। इसका अर्थ है कि किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में पूरे मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होगा। दूसरे शब्दों में “वह एक साथ तैरतें हैं और एक साथ डूबते हैं” इससे यह भी संकेत मिलता है कि यदि कोई मंत्री मंत्रिपरिषद की किसी नीति या निर्णय से सहमत नहीं है तो उसे या तो वह निर्णय स्वीकार करना होगा या त्यागपत्र देना होगा। यह सभी मंत्रियों पर बाध्यकारी है कि वह उस नीति का पालन करें जो उनका सामूहिक उत्तरदायित्व निर्धारित करती है।

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