भारत में विज्ञान पर अलबरूनी के योगदान की व्याख्या करें।

    प्रश्नकर्ता rameshwar
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    अलबरूनी ने अपनी रचना ‘किताब उल हिन्द‘ अथवा ‘तहकीक-ए-हिन्द‘ की रचना गजनी में की थी। यह रचना भारतीय संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान के सम्बन्ध में जानकारी का अत्यन्त मूल्यवान स्रोत है।

    अलबरूनी ने भारतीय विज्ञान के सम्बन्ध में विस्तृत चर्चा की है। उसकी चर्चा खगोल विद्या, रसायन, भूगोल, भूगर्भ शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र एवं चिकित्सा जैसे विषयों से  सम्बन्धित है।

    अलबरूनी की शिक्षा खगोलशास्त्री के रूप में हुई थी और जीवन के आरंभिक चरण में उसने ख्वारिज्म के दरबार में और  संभवतः गजनी के दरबार में भी ज्योतिषी के रूप में कार्य किया वह विभिन्न ग्रहों की चर्चा करता है।

    चांद की गति और उसके प्रमुख कारणों की व्याख्या करता है। उसने वराहमिहिर की रचना लघुजातक का अरबी में अनुवाद किया।

    इसके अतिरिक्त उसने वृहत् संहिता, मत्स्य पुराण और वायुपुराण जैसी रचनाओं का भी गहन अध्ययन किया था और इसके अनेक उद्धरण इसने प्रस्तुत किए हैं।

    अलबरूनी ने रसायन के बारे में भी चर्चा की है, जिसमें प्रधान  अभिरुचि सोना बनाने के काम में रहती थी। अलबरूनी ने इसका खण्डन किया है और इसे तर्क संगत नहीं माना है।

    किन्तु रसायनों का प्रयोग औषधि के रूप में वह मानता है। उसने आयुर्वेद सम्बन्धी  अरबी रचना ‘फिरदौस अलहिकमा’ का संभवतः स्रोत के रूप में उपयोग किया और इसी के माध्यम से उसने चरक संहिता के सम्बन्ध में जानकारियाँ प्रस्तुत की सुश्रुत संहिता से वह परिचित नहीं था और  उसके विवरण में शल्य चिकित्सा की कोई चर्चा नहीं हैं।

    भारतीय संस्कृति और विज्ञान के सम्बन्ध में अलबरूनी की  टिप्पणी इसलिए मूल्यावान है कि इसके माध्यम से इस्लामी जगत में  हिन्दुओं के ज्ञान-विज्ञान का परिचय प्रस्तुत हुआ और जो बौद्धिक सम्पर्क अरब शासनकाल में स्थापित हुआ था और तत्पश्चात् शिथिल  पड़ गया था इसकी पुनरावृत्ति संभव हो सकी।

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