भारत में दलित आंदोलन पर चर्चा कीजिए

    प्रश्नकर्ता MD
    Participant
Viewing 1 replies (of 1 total)
  • उत्तर
    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    भारत में दलित आंदोलन:- भारत में पारम्परिक समाज की अंग्रेजी राज में जड़ता टूटने से दलितों ने सबसे पहले तत्कालीन बंगाल के फरीदपुर जिले में नमः शूद्र आन्दोलन चलाया।

    वे असफल हो गये क्योंकि न तो उनके पास धन था और न ही संगठन की क्षमता। इसलिए यह आंदोलन चल नहीं सका।

    ट्रावनकोर कोचीन में भी 1840 ई. के दशक में दलित आंदोलन आरंभ हुआ जिसे आदि आंदोलन कहा गया। आदि का अर्थ है कि दलित यह मानते थे कि पहले उनकी अवस्था अच्छी थी। वे पराजित हो गए और तब उनकी स्थिति कमजोर हो गई। यह आंदोलन भी असफल हो गया।

    लंबे समय बाद 1918 ई. में अम्बेडकर ने मुम्बई में एक अपना आंदोलन शुरू किया। आरंभ में उन्होंने ‘दलित संघ‘ बनाया, फिर ‘पिछड़ों का महासंघ’ बनाया, बहिष्कृत भारत पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया

    , 1927 ई. में न्यू लेबर पार्टी नामक एक राजनीतिक दल बनाया, 1931 ई. में, जाति-पाति तोड़ो आंदोलन किया। इसके पहले महाड में सार्वजनिक जलाशयों के इस्तेमाल का आंदोलन और तब मंदिरों में प्रवेश का कलसम आंदोलन वे कर चुके थे।

    अम्बेडकर ने 1938 ई. में ‘रीडिल्स ऑफ हिन्दूइज्म्’ और 1946 ई. में ‘एनीहिलेशन ऑफ कॉस्ट’ नामक निबंध लिखा। 1956 ई. में उन्होंने हिंदूधर्म को छोड़कर बौद्धधर्म को अपना लिया। उन्हें अनेक धर्म के लोगों ने आमंत्रण दिया परन्तु अंततः वे बौद्धधर्म की ओर आकर्षित हुए।

     

    महात्मा गाँधी ने 1932 ई. में अम्बेडकर से विवाद के बाद और पुणे में अम्बेडकर से समझौते के बाद ‘हरिजन’ नामक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया। गाँधीजी से पहले भी कुछ नेता दलितों की स्थिति से परिचित थे और उनके सुधार के लिए प्रयास कर रहे थे।

    गाँधीजी ने 3000 कि.मी. की पदयात्रा की। 1937 ई. में प्रांतों में जो काँग्रेस की सरकारें बनी थीं, उन्हें दलितों को मंदिर में प्रवेश के लिए कानून बनाने को बाध्य किया। गाँधीजी का आंदोलन सरकारी अधिकारों से पुष्ट होकर आजादी के बाद प्रभावशाली ढंग से संचालित हुआ।

    बहुजन समाज आंदोलन को कांशीराम ने पंजाब में आरंभ किया। वे पुणे के सरकारी दवा कम्पनी IDPL में कार्यरत थे।

    अम्बेडकर जयंती के मुद्दे पर विवाद होने पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया और मुम्बई गए। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इण्डिया में योगदान किया।

    यह पार्टी अनेक गुटों में बँटी थी। इसलिए वे पंजाब आये। 1982 ई. में दलित शोषित चार  बनाया अर्थात दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक का संगठन।

    पंजाब में इस पार्टी का आरंभिक समय बड़ा ही अच्छा था, बाद में असफल हो गया। वे 1986 ई. में उत्तर प्रदेश आए और ‘बहुजन समाज’आंदोलन को आरंभ किया।

    इन सभी समूहों से बना हुआ ट्रेड यूनियन संगठन वामसेफ इन आंदोलन का वैचारिक और वित्तीय आधार है, जो भारत में अब तक के दलित आंदोलनों में सबसे शक्तिशाली आंदोलन रहा है।

    संवैधानिक उपाय : इन्हें अनुच्छेद 15 के अंतर्गत विशेष सुविधायें दी गई हैं।

    अनु. 16 (4) में नौकरियों में आरक्षण, अनु. 17 में अस्पृश्यता पर रोक, अनु. 32 में संवैधानिक उपचार का प्रावधान है।

    एक समय में डॉ. अम्बेडकर इस अनुच्छेद से बहुत प्रभावित थे,

Viewing 1 replies (of 1 total)
  • इस प्रश्न पर अपना उत्तर देने के लिए कृपया logged in कीजिये