भारतीय लोकतंत्र को आपातकाल के रूप में क्या सबक मिला

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    उत्तरकर्ता Quizzer Jivtara
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    भारत में आपातकाल अभी तक तीन बार 1962, 1971 और 1975 में घोषित किए गए हैं।

    पहला राष्ट्रीय आपातकाल अक्तूबर 1962 में चीन के नेफ़ा में एकत्रीकरण के कारण लागू किया गया था और यह जनवरी 1968 तक जारी रहा अतः 1965 में पाकिस्तान के विरुद्ध हुए युद्ध में नया आपातकाल जारी करने की आवश्यकता नहीं हुई।

    दूसरा राष्ट्रीय आपातकाल दिसंबर 1971 में पाकिस्तान के आक्रमण के फलस्वरूप जारी किया गया।

    यद्यपि यह आपातकाल प्रभावी था किंतु एक तीसरा राष्ट्रीय आपातकाल जून 1975 में लागू हुआ।

    दूसरी तथा तीसरी दोनों ही आपातकाल घोषणाएं मार्च 1977 में बंद की गईं।

    पहली दो आपातकाल घोषणाएं (1962 और 1971) बाहरी आक्रमण की पृष्ठभूमि पर जबकि तीसरी आपातकाल घोषणा (1975) ‘आंतरिक उपद्रव’ के कारण थी ||

    आपातकाल के प्रभाव :-

    आपातकाल का तत्कालीन परिणाम यह हुआ कि नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिऐ गये जिससे शासन-प्रशासन की मनमानी का दौर चल पड़ा।

    पुलिस एवं सरकारी तन्त्र निरंकुश बन गया।

    सरकारी कार्यक्रमों को बलपूर्वक थोपा जाने लगा। इसका दूरगामी परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस का सत्ता पर एकाधिकार समाप्त हो गया और जनता पार्टी सत्तासीन हुई।

    कानूनों में अनेक फेरबदल किये गये और आपातकाल लगाये जाने की स्थितियों को पुनर्परिभाषित किया गया।

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