बाल विवाह किस लेखक की रचना है

    प्रश्नकर्ता yoginath
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
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    बाल विवाह बालकृष्ण भट्ट लेखक की रचना है

    बालकृष्ण भट्ट का हिंदी के निबंधकारों में महत्वपूर्ण स्थान है।

    भट्ट जी अपने युग के न केवल सर्वश्रेष्ठ निबंधकार थे, अपितु सफल नाटककार और साहित्यकार भी थे।

    इन्होंने साहित्यिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, नैतिक, दार्शनिक और सामयीक, सभी विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। बालकृष्ण भट्ट के नाटकों के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक प्रश्नों को ।

    उठाते हुए साहित्यिक एवं सामाजिक परिदृश्य को उद्घाटित किया गया है।

    पण्डित बालकृष्ण भट्ट भारतेन्दु-युग के सबसे अधिक सजग, सक्रिय व प्रतिभाशाली लेखक तथा सर्वश्रेष्ठ नाटककार थे। भट्ट जी समाज की समस्याओं को उठाने मेंजागरूकता के प्रतीक थे।

    इनके नाटक सामाजिक जीवन की झलक के साथ राजनीतिक हलचल से परिपूर्ण होते थे, जो अंध परम्परा का विरोध करते हुए जन-साधारण को सही रास्ते पर लाने का प्रयत्न करते थे

    , जिनमें समाज-सुधार की भावना भरी रहती थी, जो जीवन को उन्नत बनाने में प्रयत्नशील थे, जिनमें देश की हीन अवस्था का चित्रण करके देश-वासियों को जागरूक करने की प्रेरणा भरी हुई थी,

    जो राष्ट्रव्यापी शोषण का चित्रण करके राष्ट्र को पराधीनता की बेड़ियों से उनमुक्त करने के लिए प्रोत्साहन देते थे।

    उनके मौलिक नाटकों में नल-दमयंती स्वयंवर, बाल-विवाह, चंद्रसेन, रेल का विकट खेल, नई रोशनी का विष, वृहन्नला, वेणीसंहार, कलिराज की सभा, शिक्षादान, आदि हैं।

    इन नाटकों में सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य करने के साथ-साथ अतीत के गौरव को भी अभिव्यक्त किया गया है। भट्ट जी ने बंगला तथा संस्कृत के नाटकों के अनुवाद भी किए हैं, जिनमें वेणुसंहार, मृच्छकटिक, पदमावती आदि प्रमुख हैं।

    भट्ट जी ने गंभीर विषयों पर भी लेखनी चलाई है। साहित्यिक और सामाजिक विषय भी भट्ट जी से अछूते नहीं बचे। ‘नई रोशनी का विष में भट्ट जी ने समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिए नई चेतना का सन्देश छोड़ा है।

    भट्ट जी के नाटकों में सुरुचि-संपन्नता, कल्पना, बहुवर्णन शीलता के साथ-साथ हास्य व्यंग्य के भी दर्शन होते हैं। रामविलास शर्मा भट्ट जी के बारे में अपने विचार रखते हैं- “विचारों की उदारता में वह युग के साथ थे, वहीं कहीं उससे आगे भी थे।

    समाज और साहित्य के विकास में उनकी धारणा अपनी थी, जो आज भी व्यापक रूप से वे समाज द्वारा नहीं अपनायी गयी धर्म, दर्शन, इतिहास और साहित्य आदि के प्रति भट्ट जी के विचारों को देखते हुए कह सकते हैं कि वह अपने युग के सबसे महान विचारक थे।

    भारतेंदु युग और हिंदी भाषा की विकास परम्परा  रामविलास शर्मा,  आगे डॉ. रामविलास शर्मा ने तो भट्ट जी को केवल प्रताप नारायण मिश्र से ही नहीं, अपितु भारतेंदु हरिश्चंद्र से भी बढ़कर माना है और लिखते हैं – “भट्ट जी का बहुविध साहित्य जनता को अंग्रेजी राज के सच्चे रूप से परिचित करता है।

    अंग्रेजों की न्याय व्यवस्था, उनकी सभ्यता, उनकी राजनीति इनसे चमत्कृत न होकर भट्ट जी ने उनकी वास्तविकता उद्घाटित की है। पैनी सूझ-बूझ के अलावा यह साहस का काम भी था।

    वह अपने युग के श्रेष्ठ क्रांतिकारी विचारक थे। इस दृष्टि से वे भारतेंदु से भी बढ़कर थे। आपके नाटकों में विचारों की गहनता, विषय की विस्तृत विवेचना, गम्भीर चिन्तन के साथ एक अनूठापन भी है।

    बालकृष्ण भट्ट के नाटकों में समकालीन बोध एवं सामाजिक तथ्यों की संभावना है।

    नाटककार मानव जीवन के व्यापक सन्दों और यथार्थ जीवन के विविध आयामों से विषय चुनकर समाज के लिए ही अपने नाटकों का निर्माण करता है।

    जीवन के यथार्थ एवंबाटाकृष्ण भट्ट व्यापक सन्दर्भो को बालकृष्ण भट्ट के नाटकों में हम देख सकते हैं। सही मायने में बालकृष्ण भट्ट जी सामाजिक जागरूकता के प्रतीक माने जाते हैं।

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