प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार प्लेट संचरण की सीमाओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए

    प्रश्नकर्ता jid
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत :-  प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत का प्रतिपादन 1962 ई. में हैरीहेस ने किया। इस सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी की भू-पर्पटी अनेक छोटी-बड़ी प्लेटों में विभक्त है।

    ये प्लेटें 100 किमी. की मोटाई वाले स्थलमण्डल (लिथोस्फेयर) से निर्मित होती हैं एवं दुर्बलमण्डल (एस्थेनोस्फेयर) पर तैरती रहती है। नासा (NASA) के अनुसार प्लेटों की संख्या 100 तक बताई गई हैं परन्तु अभी तक 7 मुख्य तथा 20 छोटी प्लेटों को पहचाना गया है।

    सात मुख्य विवर्तनिक प्लेटें हैं

    1. अंटार्कटिक प्लेट

    2. उत्तरी अमेरिकी प्लेट

    3. दक्षिणी अमेरिकी प्लेट

    4. प्रशांत महासागरीय प्लेट

    5. इंडो-आस्ट्रेलियनन्यूजीलैण्ड प्लेट

    6. अफ्रीकी प्लेट

    7. यूरेशियाई प्लेट।

    प्लेट संचरण की सीमाए:-

    प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त में प्लेट किनारों का अध्ययन ही अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकांश भूगर्भिक घटनाएँ प्लेट किनारों के सहारे ही घटित होती हैं।

    ये प्लेट किनारे निम्न तीन प्रकार के होते हैं

    1. अपसारी सीमा (Divergent Boundaries)– इसमें दो प्लेट विपरीत दिशाओं में सरकती हैं। इनसे नये भूखण्ड की उत्पत्ति होती है। अतएव इन्हें रचनात्मक प्लेट किनारे भी कहते हैं।

    वह स्थान जहाँ से प्लेट एक-दूसरे से हटती हैं, उसे प्रसारी स्थान (Spreading Site) कहा जाता है। मध्य अटलांटिक कटक इसका प्रमुख उदाहरण है जहाँ उत्तरी अमेरिकन तथा दक्षिणी अमेरिकन प्लेटें, यूरेशियन तथा अफ्रीकी प्लेट से अलग हो रही हैं।

    2. अभिसरण सीमा (Convergent Boundaries)-जहाँ दो प्लेट आमने-सामने सरकती हैं। इससे प्लेट किनारों का विनाश होता है। अतएव इन्हें विनाशात्मक प्लेट किनारे या प्रविष्ठन क्षेत्र (Subduction Zone) भी कहते हैं।

    3. रूपान्तर सीमा (Transform Boundaries)-जहाँ दो प्लेट अगल-बगल सरकती हैं। इससे रूपान्तर भ्रंशों का निर्माण होता है। रूपान्तर भ्रंश (Transform Fault) दो प्लेटों को अलग करने वाला तल है जो प्रमुख रूप से मध्य अटलांटिक कटकों से लम्बवत् स्थिति में मिलते हैं।

    इस प्रकार रूपान्तर सीमा में पर्पटी का न तो निर्माण होता है और न विनाश जबकि अभिसरण सीमा में पर्पटी का विनाश होता है और अपसारी सीमा में पर्पटी की रचना होती है।

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