प्रथम गुटनिरपेक्ष सम्मेलन के अध्यक्ष कौन थे

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    उत्तरकर्ता Quizzer Jivtara
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    प्रथम गुटनिरपेक्ष सम्मेलन के अध्यक्ष “जोसिप ब्रोज़ टीटो” थे |

    जोसिप ब्रोज़ टीटो यूगोस्लाविया के समाजवादी संघीय गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति थे |

    शीतयुद्ध के दौरान विश्व के देश दो खेमों में बँट रहे थे।

    इसी सन्दर्भ में गुट-निरपेक्षता ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमरीका के नव स्वतन्त्र देशों को तीसरा विकल्प दिया।

    यह विकल्प था दोनों महाशक्तियों के गुटों से अलग रहने का।

    गुट-निरपेक्ष आन्दोलन की नींव युगोस्लाविया के जोसेफ ब्रॉज टीटो, भारत के जवाहरलाल नेहरू और मिस्र के जमाल अब्दुल नासिर ने डाली।

    इन तीनों ने 1956 में एक सफल बैठक की।

    इण्डोनेशिया के सुकर्णो और घाना के क्वामे एककूमा ने इनका जोरदार समर्थन किया।

    ये पाँच नेता गुट-निरपेक्ष आन्दोलन के संस्थापक कहलाए।

    पहला गुट-निरपेक्ष सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड में हुआ।

    प्रथम गुट-निरपेक्ष सम्मेलन में 25 सदस्य देश शामिल हुए।

    समय गुजरने के साथ गुट-निरपेक्ष आन्दोलन की सदस्य संख्या बढ़ती गई।

    2006 में हवाना (क्यूबा) में हुए 14वें सम्मेलन में 118 सदस्य देश और 15 पर्यवेक्षक देश शामिल हुए।

    जैसे-जैसे गुट-निरपेक्ष आन्दोलन की लोकप्रियता बढ़ी वैसे-वैसे इसमें विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं और अलगअलग हितों के देश शामिल होते गए।

    इससे गुट-निरपेक्ष आन्दोलन के स्वरूप में बदलाव आया। यह महाशक्तियों के गुटों में शामिल न होने का आन्दोलन था।

    महाशक्तियों के गुटों से अलग रहने की इस नीति का यह मतलब नहीं है कि इस आन्दोलन से जुड़े देश अपने को अन्तर्राष्ट्रीय मामलों से अलग-थलग रखते हैं या तटस्थता का पालन करते हैं।

    गुट-निरपेक्षता का मतलब पृथक्तावाद नहीं। पृथक्तावाद का अर्थ होता है अपने को अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में काटकर रखना।

    1787 में संविधान निर्माण से लेकर 1917 तक अमरीका ने अपने को अन्तर्राष्ट्रीय मामलों से अलग रखा। उसने पृथक्तावाद या एकान्तवाद की विदेश नीति अपनायी थी।

    इसके विपरीत गुट-निरपेक्ष देशों ने, जिसमें भारत भी शामिल है, शान्ति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिद्वन्द्वी गुटों के बीच तालमेल में सक्रिय भूमिका निभाई।

    गुट-निरपेक्ष देशों की ताकत की जड़ उनकी आपसी एकता और महाशक्तियों द्वारा अपने-अपने खेमे में शामिल करने की पुरजोर कोशिशों के बावजूद किसी के खेमे में शामिल न होने के उनके संकल्प में देखी जा सकती है।

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