प्रकाश संश्लेषण में होने वाली घटनाओं का वर्णन करें

    प्रश्नकर्ता pinku
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    हरे पौधे पर्णहरित की उपस्थिति में सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा प्रयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड और जल से अपना भोजन (जैसे ग्लूकोस) स्वयं बनाते हैं,प्रकाश-संश्लेषण (photosynthesis) कहलाती है।

    प्रकाशसंश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन गैस निर्मुक्त होती है ।  प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया को निम्न प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है :

    6CO2 + 6H2O + प्रकाश ऊर्जा  –—- C6H12O6+ 6O2

    प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया पौधे की हरी पत्तियों में होती है।

    दूसरे शब्दों में, भोजन पौधे की हरी पत्तियों में बनता है। पौधे की हरी पत्तियाँ, क्लोरोफिल और सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल के संयोजन द्वारा भोजन बनाती हैं।

    भोजन बनाने के लिए आवश्यक कार्बन डाइऑक्साइड गैस को पौधे की पत्तियों द्वारा वायु से ग्रहण किया जाता है। यह कार्यन डाइऑक्साइड पत्तियों में, उनमें स्टोमैटा (stomata) नामक सूक्ष्म रन्धों द्वारा प्रवेश करती है।

    भोजन बनाने के लिए आवश्यक जल मृदा (मिट्टी) से ग्रहण किया जाता है। वह जल जड़ों और तने द्वारा मृदा (मिट्टी) से पत्तियों को पहुँचाया जाता है।

    सूर्य का प्रकाश, भोजन के निर्माण में होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं को सम्पन्न कराने के लिए आवश्यक कर्जा प्रदान करता है।

    हरी पत्तियों में उपस्थित पर्णहरित (क्लोरोफिल) नामक हरा वर्णक सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा को अवशोषित कराने में सहायता करता है।

    प्रकाशसंश्लेषण द्वारा भोजन के निर्माण के दौरान, ऑक्सीजन गैस उपजात के रूप में उत्पन्न होती है।

    यह ऑक्सीजन गैस वायु में चली जाती है। पौधे की हरी पत्तियों द्वारा बनाया गया भोजन, ग्लूकोस नामक सरल शर्करा के रूप में होता है।

    पत्तियों में बने इस ग्लूकोस भोजन को बाद में पौधे के विभिन्न भागों को भेज दिया जाता है अतिरिक्त ग्लूकोस, स्टार्च नामक एक अन्य भोजन में परिवर्तित हो जाता है।

    यह स्टार्च पौधे की पत्तियों में संचित हो जाता है। ग्लूकोस और स्टार्च, कार्बोहाइडेट्स नामक भोजनों की श्रेणी में आते हैं।

    प्रकाशसंश्लेषण द्वारा यो कार्बोहाइड्रेट्स जैसे भोजनों में रासायनिक ऊर्जा संचित होती है।

    अतः, हरे पौधे, कार्बोहाइडेट्स (भोजनों) बनाकर सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। प्रकाशसंश्लेषण द्वारा बना भोजन पौधे को सम्पूर्ण कर्जा प्रदान करता है जो उसकी वृद्धि  के लिए आवश्यक होती है।

    और जब हम पादप भोजनों (जैसे खाद्यान्नों, फलों, और सब्जियों) को खाते हैं, उनमें संचित रासायनिक ऊर्जा श्वसन के दौरान हमारे शरीर में निर्मुक्त होती है।

    हम अब वर्णन करेंगे कि प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान वास्तव में क्या होता है।

    प्रकाशसंश्लेषण निम्नलिखित तीन चरणों में होता है।

    1. पर्णहरित (क्लोरोफिल) द्वारा सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का अवशोषण।

    2. प्रकाश कां का रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन, और प्रकाश ऊर्जा द्वारा जल का हाइडोजन और ऑक्सीजन में विघटन।

    3. हाइड्रोजन द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के अपचयन से रासायनि ऊर्जा (प्रकाश ऊर्जा के रूपान्तरण द्वारा प्राप्त) के उपयोग द्वारा ग्लूकोस जैसे कार्बोहाइड्रेट का बनना।

     

    प्रकाशसंश्लेषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ
    प्रयोगों द्वारा पाया गया है कि प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया के लिए सूर्य के प्रकाश (धूप), पर्णहरित (क्लोरोफिल), कार्बन डाइऑक्साइड और जल की उपस्थिति आवश्यक होती है।

    इसलिए, हम कह सकते हैं कि, प्रकाशसंश्लेषण की प्रक्रिया होने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ हैं।
    1. सूर्य का प्रकाश या धूप (Sunlight),

    2. पर्णहरित (Chlorophyll),

    3. कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide), और

    4. जल (Water)

    प्रकाशसंश्लेषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ, स्वपोषित पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ भी होती हैं।

    हम अब प्रदर्शित करने के लिए कुछ प्रयोगों का वर्णन करेंगे कि हरे पौधों द्वारा प्रकाशसंश्लेषण के लिए सूर्य का प्रकाश (धूप), पर्णहरित (क्लोरोफिल) और कार्बन डाइऑक्साइड आवश्यक होते हैं।

    ये प्रयोग यह भी प्रदर्शित करेंगे कि पत्तियाँ अंततोगत्वा प्रकाशसंश्लेषण द्वारा भोजन के रूप में ‘स्टार्च’ (starch) बनाती है।
    प्रकाशसंश्लेषण पर प्रयोग इस तथ्य पर निर्भर होते हैं कि हरी पत्तियाँ भोजन के रूप में स्टार्च बनाती हैं। और कि स्टार्च, आयोडीन विलयन के साथ नीला-काला रंग देता है।

    अब, साधारणतया सभी पौधों में उनकी हरी पत्तियों में स्टार्च होता है, इसलिए पौधे को प्रकाशसंश्लेषण प्रयोग में उपयोग करने से पहले, उसकी पत्तियों में पहले से उपस्थित स्टार्च को हमें अवश्य दूर कर देना चाहिए।

    इस पौधे को कम से कम तीन दिनों तक कमरे में पूर्णतया अंधेरे स्थान में रखकर, पौधे की हरी पत्तियों को स्टार्च रहित बनाया जाता है।

     

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