पृथ्वी की आंतरिक संरचना का सचित्र वर्णन करें

    प्रश्नकर्ता gulab
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    पृथ्वी की आंतरिक संरचना :-  पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी देने वाले स्रोतों को दो भागों में विभाजित किया जाता है

    1. प्राकृतिक स्रोत- इसके अंतर्गत गुरुत्वाकर्षण, ज्वालामुखी व भूकम्प को शामिल किया जाता है।

    2. अप्राकृतिक स्रोत इसमें ताप, दाब, घनत्व को शामिल किया जाता है। पृथ्वी बहुत सारी संकेन्द्रीय परतों से बनी हुई है।

    परतों के निर्माण के दौरान भारी पदार्थ; जैसे-लौह एवं निकिल तत्त्व केन्द्र की ओर तथा हल्के पदार्थ; जैसेसिलिकन, एल्युमीनियम बाहर की ओर जमा हुए।

    पृथ्वी की मुख्यतः तीन परतें मानी गई हैं

    1. क्रस्ट (Crust)

    2. मैंटल (Mantle)

    3. क्रोड (Core)

    1 क्रस्ट या भूपटल या भूपर्पटी- पृथ्वी की बाहरी सतह जिस पर महाद्वीप तथा महासागर स्थित हैं, भूपटल या क्रस्ट कहलाता है।

    भूपटल की रचना सियाल (SIAL) अर्थात् सिलिका एवं एल्युमीनियम से हुई है। सियाल शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम डेली ने किया।

    भूपटल की मोटाई 5-30 किमी तक पाई जाती है। भूपटल की बाहरी परत अवसाद चट्टानों से बनी है, जबकि आन्तरिक परत ग्रेनाइट से बनी है।

    2 मैण्टल – मैण्टल (Mantle) या निचली परत बेसाल्ट चट्टानों से बनी है। यह परत सिलिका व मैग्नीशियम से निर्मित है और सीमा (Sima)
    कहलाती है।

    निचली परत में क्षारीय (Basic) पदार्थों की अधिकता है। इसी परत से ज्वालामुखी विस्फोट के समय लावा बाहर आता है।

    निचली परत या मैण्टल मुख्यतः महासागरों के नीचे होती है। इस प्रकार महासागरीय सतह का निर्माण बेसाल्ट चट्टानों से हआ है। मैण्टल के इस हिस्से में मैग्मा चैम्बर पाए जाते हैं। इसका औसत घनत्व 3.5 ग्राम/सेमी से5.5 ग्राम/सेमी है।

    मैण्टल को व्हाइट ऑफ द अर्थ कहा जाता है।

    भूपटल (Crust) एवं मैण्टल का सबसे ऊपरी भाग (100 किमी) मिलकर स्थलमण्डल का निर्माण करते हैं

    3 क्रोड  सीमा (Sima) परत के नीचे पृथ्वी की तीसरी तथा अन्तिम परत पाई जाती है, जिसे क्रोड (Core)

    कहते हैं।

    इसमें निकिल (Ni) तथा लोहा (Fe) की प्रधानता होती है। इसलिए इस परत का नाम निफे (Ni + fe) रखा गया है।

    यह 2900 किमी की गहराई से पृथ्वी के केन्द्र तक विस्तृत है। इसका घनत्व 11 से 12 तक है।

    क्रोड का भार पृथ्वी के भार का लगभग 1/3 है तथा इसका आयतन पृथ्वी के आयतन का लगभग 1/6 भाग है।

    बाह्य क्रोड सतह के नीचे लगभग 2900 से 5150 किमी तक फैला हुआ है तथा आन्तरिक क्रोड लगभग 5150 किमी से 6371 किमी पर पृथ्वी के

    केन्द्र तक फैला हुआ है। .

    इसका औसत घनत्व 13 ग्राम/सेमी है। यह पृथ्वी का लगभग 16% भाग घेरे हुए है।

    बाह्य क्रोड में भूकम्प की द्वितीयक लहरें या s-तरंगें प्रवेश नहीं कर पातीं। इससे प्रमाणित होता है कि यह भाग द्रव अवस्था में है।

    आन्तरिक क्रोड में भूकम्प की P-लहरों की गति कम अर्थात् 11.23 किमी प्रति सेकण्ड हो जाती है अर्थात् यह भाग ठोस है।

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