नैतिक व्यवस्था (ऋत) के निरीक्षणकर्ता के रूप में किस वैदिक देवता का वर्णन हुआ है?

    प्रश्नकर्ता jid
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    नैतिक व्यवस्था (ऋत) के निरीक्षणकर्ता के रूप में  वरुण  वैदिक देवता का वर्णन हुआ है

    ऋग्वैदिक काल धार्मिक जीवन अत्यधिक विषाद एवं जटिल है। यहाँ बहुदेववाद के दर्शन होते हैं। आर्यों के प्रधान देवता प्राकृतिक शक्तियों के प्रतिनिधि हैं जिनका मानवीयकरण किया गया है।

    वैदिक देवताओं को अन्तरिक्ष के देवता, पृथ्वी के देवता एवं आकाश के देवता के रूप में विभाजित किया गया है। वरुण का स्थान आकाश के देवताओं में है। वरुण जगत का नियन्ता, देवताओं का पोषक एवं ऋतु का नियामक है।

    इन्हें ऋतस्य गोपा कहा गया है। इन्द्र को विश्व का स्वामी कहा गया है। वह प्रधानतः युद्ध का देवता है। जिसे पुरन्दर कहा गया है।

    वह मेघों को रोककर जल की वर्षा करता था। विष्णु को भी आकाश के देवताओं में स्थान प्राप्त है। रुद्र का स्थान अन्तरिक्ष के देवताओं में है। इनको करुण स्वरूप में कल्पित किया गया है। अन्य सभी का स्वरूप कल्याणकारी है।

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