निरामिष किसे कहते है

    प्रश्नकर्ता dharya12
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    निरामिष मास रहित भोजन को कहते है।

    जो रात्रि में विचरण करने वाला के लिए एक शब्द है ‘निशिचर’ और  मोक्ष की इच्छा रखने वाला के लिए उपयुक्त शब्द ‘मुमुक्षु| होता है।

    निरामिषतावाद की प्रशंसा वैदिक काल से ही होती रही है। निरामिष भोजन का परिशोधक पक्ष तो संदेह से परे है। कालांतर में निरामिषतावाद एक धार्मिक आदेश के रूप में विकसित हो गया, जिससे भारत में कई जाति-संप्रदाय अब भी प्रभावित होते हैं।

    इसके कुछ अनुयायियों ने इसे मूर्खता की हद तक घसीटा है, फिर भी इसके लाभों की व्यापक चेतना नए सिरे से पश्चिम से फिर आई है। निरामिषतावाद जिसका समर्थन-प्रतिपादन महावीर, पाइथागोरस, लियो तालस्ताय और महात्मा गांधी ने किया ।

    अब संसार भर के लोगों को आंदोलित और प्रभावित कर रहा है, जिसमें वे खिलाड़ी भी शामिल हैं, जिनके लिए शारीरिक स्वास्थ्य को उच्चतम स्तर पर रखना अनिवार्य होता है। निरामिषतावाद के विषय में अनेक लोगों ने अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।

    वेजिटेरियन सोसाइटी ऑफ बॉम्बे‘ के अनुसार, निरामिष भोजन की एक खुराक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए पर्याप्त होती है। स्वाद और पौष्टिकता, दोनों की दृष्टि से संतुलित निरामिष आहार अन्य किसी भी प्रकार के आहार की बराबरी कर सकता है।

    जो भी हो निरामिष भोजन को सावधानी से इस तरह पकाना चाहिए कि इसमें कच्चे खाद्य पदार्थों और साग-सब्जी के पुष्ट गुण सुरक्षित रहें।

    डॉ अलेक्जेंडर हेग की राय है कि साग-सब्जी की दुनिया के पदार्थों और उनसे बनी चीज़ों से जीवन का परिपोषण संभव है। यही नहीं, वे यह भी कहते हैं कि यह हर प्रकार से असीमित रूप से वांछनीय है और शारीरिक तथा मानसिक दोनों प्रकार की उत्कृष्टतर ऊर्जा उत्पन्न करता है।

    इस प्रकार डॉ० एफ०जे०सायक्स दावे से कहते हैं कि साग-सब्जियों की दुनिया के आहार की एक ठीक प्रकार से चयन की गई खुराक मानव के पोषण के लिए रासायनिक दृष्टि से पूरी तरह ठीक है।

    अंतिम बात यह है कि डॉ० ओल्डफील्ड की राय में मांस एक अप्राकृत भोजन है और इससे शरीर के क्रिया-तंत्र में गड़बड़ी होने की संभावनाएँ रहती हैं  इसमें कैंसर, क्षयरोग एवं बुखार जैसे भयानक रोगों के विषाणु संक्रमित हो जाते हैं।

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