नहीं रुकती है नदी पाठ के बारे में टिपण्णी कीजिए।

    प्रश्नकर्ता pairi
    Participant
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  • उत्तर
    उत्तरकर्ता Shivani
    Participant
    • नहीं रुकती है नदी” पाठ में लेखक समझाते है की जिस तरह कि नदी थमती नहीं है, हमेशा गति में निरतंर छाती रहती है चाहे।
    • रास्ते में कोई बाधा आती है, उसको पार बिना रुके पार करती है। नदी की तरह मनुष्य को सतत प्रयास करना चाहिए और आगे बढ़ना चाइए।
    • जीवन का लक्ष्य को कभी भूलना चाहिए।
    • लेखक बताते है कि सही दिशा में महेनत करेंगे तो सारे रास्ते खुल जाएंगे हमेशा अपने कार्य और विशवास एवं निति नहीं खोनी चाहिए।
    • आत्म विश्वास जीवन की पूंजी है।
      अगर इस दिशा में लोग महेनत करेंगे तो सफलता के बादल चूमेंगे।
      जब भी ज़िन्दगी की बल खाती राह के बारे में सोचा , हर बार एक नदी का ख्याल आया !
      कई बार लगा कि हर मोड़ पे मंज़र बदल जाना , नए नए मोड़ आना , रुक जाना फिर चल पड़ना ,
      बिलकुल एक नदी की तरह !
      कभी तेज़ बहाव , कभी ठहराव ,
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