नदियों की वेदना का क्या कारण है

    प्रश्नकर्ता pinku
    Participant
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  • उत्तर
    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    नदी एक धारा है, सतत् गतिशील, हर क्षण नवीन, परम पवित्र, शक्तिवाहिनी, जीवनदायिनी, यही है

    हमारी जनता-स्वच्छ पवित्र, कर्तव्य पथ पर आरूढ़, सतत् गतिशील, निर्माण का संकल्प लिये।

    नदी के सामने अवरोध आता है वह उसकी गति को नहीं रोक पाता यही हालत जनता की भी है-कोई भी अवरोध उसके सामने ठहर नहीं पाता है पर आज जनता रूपी नदी अपवित्र होती जा रही है

    , गतिहीनता ओढ़ती जा रही है, उसकी स्वच्छता, निर्मलता, सहज-स्वाभाविकता धूमिल हो गयी है, उसकी जीवनी शक्ति कुंठित होती जा रही है यह स्थिति बड़ी पीड़ादायक है।

    यही है नदियों की वेदना का कारण। वे यही चाहती हैं, जनता उनके समान ही सतत् गतिशील रहे, कर्मठ बनी रहे, स्वच्छ रहे, पवित्र रहे और कल्याणकारी भी रहे।

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