धूमकेतु या पुच्छल तारा किसे कहते हैं

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    उत्तरकर्ता Quizzer Jivtara
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    धूमकेतु को पुच्छल तारा भी कहते हैं ।

    ये जमी हुई गैसों (Frozen gases) जैसे पानी, अमोनिया. मेथेन तथा ठोस कणों के नाभिकों से मिलकर बने होते हैं।

    ये सूर्य के चारों ओर लम्बे दीर्घवृत्तीय कक्षों (Elongated elliptical orbits) में परिक्रमा करते हैं।

    ये अधिकांश समय सूर्य से दूर रहते हैं। अत: दिखाई नहीं देते ।

    इस समय इनकी पूँछ नहीं होती।

    जब ये सूर्य के नजदीक आते हैं तो सूर्य की गर्मी के कारण इनके पदार्थ गर्म होकर वाष्पीकृत हो जाते हैं और धूमकेतु का शीर्ष (Head) बनाते हैं।

    सौर झंझा (Solar wind) के दाब के कारण धूमकेतु की पूँछ बन जाती है जो कई मिलियन किलोमीटर (1 मिलियन = दस लाख) तक फैली हुई होती है।

    इस प्रकार धूमकेतु शीर्ष और पूँछ युक्त दिखाई पड़ते हैं।

    शीर्ष का व्यास 10000 किमी से 20000 किमी तक हो सकता है। धूमकेतु का द्रव्यमान बहुत ही कम लगभग पृथ्वी के द्रव्यमान का 1/102वाँ भाग होता है।

    जब धूमकेत सूर्य के नजदीक होते हैं तब इनकी लम्बाई अधिकतम होती है।

    जब ये सूर्य से दूर होते हैं तो दूरदर्शी से भी दिखाई नहीं देते हैं।

    अधिकांश धूमकेतुओं की कक्षाएँ प्लूटो की कक्षा से बड़ी होती हैं । अतः ये धूमकेतु पृथ्वी से कभी भी दिखाई नहीं देते।

    अधिकांश धूमकेतु 4 वर्ष से लेकर 100 वर्ष तक दीर्घवृत्तीय कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

    हेली (Halley) ने ऐसे धूमकेतु की खोज की थी जो 76 वर्ष के अन्तराल में दिखाई पड़ता है। इसे हेली का पुच्छल तारा कहते हैं। यह पुच्छल तारा सन् 1986 में दिखाई दिया था। यह पुनः सन् 2062 में दिखाई देगा।

    वैज्ञानिक अनुसन्धानों से ज्ञात हुआ है कि कुछ धूमकेतु परवलीय कक्षाओं (Parabolic orbits) में परिक्रमा करते हैं और एक बार सूर्य के नजदीक से गुजरने के बाद पुनः वापस नहीं आते।

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