गुप्त वंश का संस्थापक कौन था वर्णन कीजिए

    प्रश्नकर्ता shashank
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    उत्तरकर्ता Quizzer Jivtara
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    श्री गप्त-गुप्त वंशावली की दृष्टि से तीन अभिलेख महत्वपूर्ण हैं। जिनमें समद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति में, कुमारगुप्त के बिलसड़ स्तम्भ लेख तथा स्कन्दगुप्त के भीतरी अभिलेख में गुप्त वंशावली दी गयी है। इन वंशावलियों से यह पता चलता है कि गुप्त वंश का आदि पुरुष अथवा संस्थापक श्रीगुप्त था। पुराणों में गुप्त सम्राटों के लिए गुप्त वंशजा; कहा गया है। जिससे यह जानकारी होती है कि वे गुप्त नामक व्यक्ति के वंशज थे। इसी आधार पर कुछ विद्वानों का यह मानना है कि गुप्त वंश के संस्थापक का नाम ‘गुप्त’ था और गुप्त के संग आदरसूचक शब्द है। एलन और जायसवाल का यही मत है। प्रभावती गुप्ता के पूना ताम्रपत्र में भी श्रीगुप्त को गुप्त वंश का आदिराज बताया गया है। डा. रमेशचन्द्र मजूमदार तथा डा. गांगुली श्रीगुप्त को इत्सिंग के चि-लि-कि-तो मानते हैं।

    श्रीगुप्त का कोई अभिलेख प्राप्त नहीं हुआ है। बाद में उसके वंशजों के अभिलेखों में उसके लिये ‘महाराज’ उपाधि का प्रयोग किया गया है। वस्तुतः इस काल में ‘महाराज’ की उपाधि का प्रयोग राजा के लिए नहीं किया जाता था बल्कि यह सामन्तों के लिए किया जाता था। महाराजाधिराज उपाधि का प्रयोग स्वतन्त्र राजाओं द्वारा किया जाता था। गुप्त सम्राटों के अभिलेखों में भी महाराज उपाधि का प्रयोग सामन्तों के लिए किया गया है। अतः अनेक विद्वानों का मानना है कि श्रीगुप्त एक साधारण सामन्त था।

    श्रीगुप्त के काल की किसी भी घटना की जानकारी नहीं है। केवल चीनी बौद्ध यात्री इत्सिंग ने एक परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा है कि राजा गुप्त ने मृगशिखावन में चीनी यात्रियों के लिए एक मंदिर (चैत्य) निर्मित करवाया था और चीनी भिक्षुओं को उसके समीप ही 24 ग्राम दान में दिये थे। डा. हेमचन्द्र राय चौधरी के अनुसार यह गुप्त गुप्त वंश की स्थापना करने वाला श्रीगुप्त ही था। इत्सिग के विवरण के आधार पर डा. राधाकुमुद मुखर्जी ने महाराज श्रीगुप्त का शासन काल 240-280 ई. के बीच निर्धारित किया है। विन्सेन्ट स्मिथ ने 319 ई. को चन्द्रगुप्त प्रथम का राज्यारोहण वर्ष स्वीकार किया है क्योंकि इस वर्ष से गुप्त सम्वत् आरम्भ होता है। इस आधार पर स्मिथ महोदय ने श्रीगुप्त का काल 275-300 ई. निर्धारित किया है। प्रायः विद्वान इन्हीं तिथियों को स्वीकार करते हैं।

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