खिलाफत आन्दोलन का वर्णन कीजिये

    प्रश्नकर्ता rameshwar
    Participant
Viewing 1 replies (of 1 total)
  • उत्तर
    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    खिलाफत काँग्रेस का निर्माण– 1919 ई. में अंग्रेजों पर दबाव डालने के लिये मौलाना महम्मद अली और मौलाना शौकत अली के नेतृत्व में खिलाफत काँफ्रेन्स का निर्माण किया गया। ये दोनों पत्रकार थे और दिल्ली में ‘कामरेड’ तथा ‘हमदर्द’ दो पत्रिकाओं का सम्पादन करते थे।

    युद्ध समाप्त होते ही इन्होंने इस संस्था का निर्माण किया और आन्दोलन के लिये उद्यत हो गये। इस संस्था का गठन 1919 ई. के लीग के अधिवेशन में किया गया था। 1920 ई. में लीग का अधिवेशन दिल्ली में किया गया।

    इसमें महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू, मदनमोहन मालवीय उपस्थित थे। गांधीजी को सम्मेलन का अध्यक्ष बनाया गया। इस प्रकार काँग्रेस ने खिलाफत आन्दोलन का पूरा समर्थन दिया।

    खिलाफत आन्दोलन–1920 ई. में सेबेस की सन्धि से तुर्की साम्राज्य समाप्त हो गया। उसका अधिकांश भाग इंग्लैण्ड और फ्रान्स ने ले लिया और उन्होंने सुल्तान का खलीफा पद समाप्त कर दिया। भारतीय मुसलमानों की दृष्टि में यह एक बड़ा विश्वासघात था।

    इसी से खिलाफत आन्दोलन शुरू हुआ। गाँधीजी ने खिलाफत आन्दोलन को मुस्लिम जनता के लिये जन्म-मरण का प्रश्न बतलाया और इसके लिये उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता का आह्वान किया।

    गाँधीजी का विचार था कि भारत में किसी आन्दोलन की सफलता के लिये यह आवश्यक थी। 30 जून, 1920 ई. को इलाहाबाद में हिन्दू-मुसलमानों का संयुक्त सम्मेलन हुआ जिसमें खिलाफत आन्दोलन के साथ असहयोग आन्दोलन चलाने का निर्णय किया गया।

    खिलाफत आन्दोलन एक साम्प्रदायिक आन्दोलन था। इससे भारत को लाभ होने की अपेक्षा हानि होने की सम्भावना अधिक थी क्योंकि हिन्दुओं पर भी इस साम्प्रदायिक आन्दोलन का प्रभाव पड़ता और उनमें राष्ट्रीयता के स्थान पर साम्प्रदायिकता की वृद्धि हो सकती थी। खिलाफत आन्दोलन को गाँधीजी ने हिन्दू-मुस्लिम एकता का स्वर्णिम अवसर समझा।

    आन्दोलन-खिलाफत आन्दोलन की तीन माँगें थीं

    (1) तर्की सल्तान का खलीफा पद यथावत् रखा जाये

    (2) जजीरतुल अरब जो इस्लाम का धार्मिक केन्द्र था मुस्लिम शासन के अन्तर्गत रखा जाये

    (3) खलीफा द्वारा मुस्लिम तीर्थ स्थानों की रक्षा की जाये। इस आन्दोलन के तीन चरण थे

    (1) दिसम्बर, 1919 तक इसमें मौलाना मुहम्मद अली और मौलाना शौकतअली ने घोषणा की कि मुसलमान रोलट एक्ट विरोधी आन्दोलन में शामिल होंगे और दोनों आन्दोलन एक कर दिये जायेंगे, एक प्रतिनिधि मण्डल इंग्लैण्ड भी भेजा गया।

    सारे देश में 17 अक्टूबर को खिलाफत दिवस मनाया गया। 23 नवम्बर को दिल्ली में खिलाफत की सभा में पहली बार गाँधीजी ने ‘असहयोग’ शब्द का प्रयोग किया ।

    (2) दिसम्बर, 1919 ई. से मई, 1920 ई. तक, आन्दोलन का रूप व्यापक हुआ, प्रदर्शन और सभाएँ आयोजित की गईं। मुसलमानों ने अरब प्रदेश से अंग्रेजी सेना हटाने की माँग की। लेकिन मुस्लिम नेता खिलाफत आन्दोलन के लिये कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं कर सके।

    अन्त में 7 मार्च, 1920 ई. को गाँधीजी द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें अहिंसात्मक तरीके से 19 मार्च को खिलाफत दिवस मनाना तथा इसके बाद ब्रिटिश सरकार से असहयोग करना था।

    (3) मई, 1920 ई. से अगस्त, 1920 ई. तक खिलाफत आन्दोलन का तीसरा चरण था। इस काल में खिलाफत आन्दोलन असहयोग आन्दोलन का एक भाग बन गया। जब 1922 ई. में तुकी में खलीफा पद मुस्तफा कमाल पाशा ने समाप्त कर दिया तब खिलाफत आन्दोलन भी समाप्त हो गया।

Viewing 1 replies (of 1 total)
  • इस प्रश्न पर अपना उत्तर देने के लिए कृपया logged in कीजिये