कैदी और कोकिला कविता की व्याख्या

    प्रश्नकर्ता pinku
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
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    कैदी और कोकिला कविता की व्याख्या :-

    कविता का सार ‘एक भारतीय की आत्मा के नाम से प्रसिद्ध माखनलाल चतुर्वेदी की ‘कैदी और कोकिला’ रचना राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत है

    कैदी और कोकिला यह कविता 1930 ई. में जबलपुर सेन्ट्रल जेल में लिखी गयी थी, जब कवि बैतुल में जंगल-सत्याग्रह में एक वर्ष की सज़ा पाकर बंदी था।  इस कविता में जेल-जीवन की कठिन ज़िन्दगी का भावपूर्ण चित्र प्रस्तुत किया गया है।

    माखनलाल चतुर्वेदी ने स्वाधीनता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जब वे जेल में थे तो स्वाधीनता सेनानियों के साथ जेल में हो रहे दुर्व्यवहार को आधार बनाकर यह कविता लिखी।

    यह कविता उनके अनुभव की प्रामाणिकता को दर्शाती है। ‘कैदी और कोकिला’ कविता ब्रिटिश उपनिवेशवाद के शोषण-तंत्र को उजागर करती है। कवि अपनी काल-कोठरी में नितांत अकेला और हतोत्साहित है।

    उसे कोयल की कूक सुनाई पड़ी। माधुर्यपूर्ण वाणी की अपेक्षा कोयल किसी और स्वर में ही बोल रही थी। कवि उसके इस व्यवहार का अर्थ न समझ सका।

    उसे लगा कि कोयल अपने माधुर्य को त्यागने के लिए विवश इसलिए हुई है क्योंकि उससे स्वाधीनता सेनानियों की दुर्दशा देखी नहीं जाती। वह कोयल से पूछता है कि वह इतनी विचलित क्यों है? वह अपना स्वाभाविक राग क्यों भूल बैठी? क्या वह कोई संदेशा लाई है कवि के लिए। कवि स्वयं को कानूनी अपराधियों के साथ रखे जाने एवं उन्हीं के समान दुर्व्यवहार किए जाने से क्षुब्ध है।

    कवि मातृभूमि के प्रति अपने समर्पण के कारण हथकड़ियों को गहना मानता है और कोल्हू के बैल के स्थान पर पेट के बल जुआ खींचते समय उससे एहसास होता है कि वह अंग्रेजी राज का संपूर्ण दर्प धीरे-धीरे चूर कर रहा है।

    कवि रह-रह कर कोयल की वेदनापूर्ण आवाज से चौंक उठता है। कवि को प्रतीत होता है कि कोयल अपनी वेदनापूर्ण आवाज से क्रांति का सूत्रपात कर रही है। कवि के अकेलेपन में कोयल उसकी गहन मित्र बनी हुई है। कोयल को चेताते हुए कवि कहता है कि इस भयानक उथल-पुथल के दौर में तुम क्यों बेचैन हो रही हो।

    तुम अपना स्वाभाविक गान सुनाओ। संकट-सागर में पड़कर इसे नष्ट न करो। कवि को कोयल के स्वच्छंद रहने पर उससे ईर्ष्या हो रही है।

    कवि को दुख है कि वह दस फुट की तंग जगह पर रहने को विवश है जबकि कोयल को उड़ने के लिए पूरा आकाश मिला हुआ है, फिर भी वह नन्हीं जान अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध छेड़ने को आतुर है। अंततः कवि कोयल की पुकार से प्रेरित हो स्वाधीनता हेतु अपना सर्वस्व न्यौछावर करने का व्रत लेता है।

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