कायिक प्रवर्धन किसे कहते हैं

    प्रश्नकर्ता rameshwar
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    उत्तरकर्ता jivtarachandrakant
    Moderator

    कायिक प्रवर्धन – कायिक प्रवर्धन अलैंगिक जनन ही होता है। यह केवल पादपों मैं होता है। कायिक प्रवर्धन में पौधे का सम्पूर्ण शरीर या शरीर का कोई अंग (पुष्प को वेड़कर) भाग लेता है।  इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।

    यह मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं|1. प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन 2. कृत्रिम कायिक प्रवर्धन

    1. प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन पौधों में स्वतः होने वाले कायिक प्रवर्धन को प्राकृतिक कायिक प्रवर्धन कहते हैं। इस प्रकार की कायिक जनन पुष्पी पादपो में निम्नलिखित प्रकार से होता है

    (a) जड़ों द्वारा (By roots)- शकरकन्द, सतावर, शलजम इत्यादि |पौधों की जड़े भोजन संचय करती हैं तथा इन पर कलिकाएँ होती है| इन्हीं कलिकाओं से नये पौधों का निर्माण होता रहता है।

    (b) तनों द्वारा (By stems)- पौधों के विभिन्न प्रकार के तने कायिक प्रवर्धन में महत्वपूर्ण रूप से भाग लेते हैं। इन तनों में भोजन |संचित होता है तथा पर्वसन्धियों पर जो कलिकाएँ होती हैं उनसे नये पौधे बनते हैं।

    उदाहरण- आलू, बंडा, अदरक, पुदीना, स्ट्राबेरी, लहसुन, अनानास आदि।

    (c) पत्तियों द्वारा (By leaves)– कुछ पौधों की पत्तियाँ भी भोजन का संग्रह करती हैं। विशेष अनुकूल अवस्थाओं में इन पर कलिकाएँ |बनती हैं जो नये पौधों को जन्म देती हैं। उदाहरण- ब्रायोफिलम, बोगोनिया आदि।

    2. कृत्रिम कायिक प्रवर्धन – मनुष्य द्वारा पौधों में कृत्रिम ढंग से किये गये कायिक जनन को कृत्रिम कायिक प्रवर्धन कहते हैं।

    (a) कलम लगाना (Cutting)- गुलाब, गन्ना, गुड़हल, अंगूर |आदि के पौधो को इस विधि से उगाया जाता है। इस विधि द्वारा पौधों की शाखाओं को काटकर भूमि में गाड़ दिया जाता है।

    कटे हुए भाग से जड़ें निकलती हैं और इनकी कलिकाएँ बढ़कर नये पौधे को जन्म देती हैं।

    (b) दाब लगाना (Layering)- सेब, नाशपाती, चमेली, नींबू आदि में शाखाएँ कठोर होती हैं। अतः सरलता से कलम के रूप में प्रवर्धित नहीं हो पाती है। इसलिए पौधे की शाखा के कुछ भाग को भूमि में दबा देते हैं।

    बाद में, इसी भाग से अपस्थानिक जड़े निकल  आती हैं।  अब मुख्य-पौधे से इसे काटकर अलग कर लेते हैं इससे नया पौधा बन जाता है।

    (c) गुटी (Gootee) लगाना- यह वायु में दाब लगाने के समान है। किसी शाखा को छीलकर खाद्य यक्त मिट्टी लेप दी जाती है तथा टाट इत्यादि लपेटकर सुतली आदि से बांधकर छोड़ दिया जाता है।

    कुछ दिन बाद अपस्थानिक जड़ें निकल आती हैं। अब मुख्य पौधे से इसे काटकर अलग कर लेते हैं, इससे नया पौधा बनता है।

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