इब्नबतूता ने अपनी यात्रा का विवरण किस भाषा में लिखा था ?

    प्रश्नकर्ता user psc
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    उत्तरकर्ता pscfighter
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    इब्नबतूता ने अपनी यात्रा का विवरण ‘रेहला’ नामक पुस्तक में “अरबी भाषा ” में लिखा था |

    इब्नबतूता अफ्रीका (मोरक्को) का निवासी था और यात्री के रूप 1333 ई. में भारत आया ।

    वह चौदह वर्ष भारत में रहा ।

    उसने वर्ष 1335 में रैहला की रचना की थी |

    इब्नबतूता का विवरण यात्री और यात्रा लेखक के तौर पर बहुत ही मूल्यवान है।

    दिल्ली में अपने परिचितों से मिली जानकारी के आधार पर उसने ऐबक से लेकर गयासुद्दीन तुगलक तक सुल्तानों का विवरण रचा ।

    एम. हुसैन के अनुसार, इब्नबतूता की रेहला ‘इतिहास की खान है’ सुल्तान मुहम्मद तुगलक ने उसे दिल्ली में काजी के पद पर नियुक्त किया जिस पद पर उसने दस वर्ष कार्य किया।

    बाद में सुल्तान ने असन्तुष्ट होकर उसे उस पद से हटा दिया।

    परन्तु जब सुल्तान उससे पुनः संतुष्ट हो गया तब उसने उसे अपना राजदूत बनाकर चीन भेजा यद्यपि वह वहां कभी पहुंच नहीं सका।

    उसके पश्चात वह स्वदेश वापिस चला गया तथा 25 वर्ष तक मोरक्कों के सुल्तान के संरक्षण में रहा।

    उसी की आज्ञा पर उसने अपनी विदेश यात्रा का विवरण लिखा जो रेहला नामक ग्रन्थ कहलाया।

    रेहला में भारत की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति का विस्तृत वर्णन किया गया है।

    उसने सुल्तान गियासुद्दीन तुगलक की गुप्तचर-व्यवस्था, डाक व्यवस्था, और उसकी मृत्यु की परिस्थितियों का वर्णन किया।

    परन्तु सुल्तान मुहम्मद तुगलक के शासनकाल की परिस्थितियों का उसने अधिक विस्तृत रूप से वर्णन किया।

    उसने सुल्तान की क्रूरता, उदारता, राजधानी-परिवर्तन और उसके परिणाम आदि का वर्णन किया।

    उसने दिल्ली नगर, विभिन्न नगरों के बाजार, भारतीय उत्सवों, मेलों, पशु-पक्षियों, वेश-भूषा, बंगाल की जलवायु आदि का वर्णन किया।

    इस प्रकार, रेहला से हमें तत्कालीन इतिहास, राजनीति, शासन-व्यवस्था, दरबार का जीवन, नागरिक जीवन, अर्थ-व्यवस्था, सामाजिक स्थिति आदि सभी के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है।

    इब्नबतूता धर्म और कानून का विद्वान था। उसने रेहला को भारत में नहीं लिखा। इस कारण, उस पर न कोई दबाव था और न ही उसे कोई लालच ।

    उसने अपने विवरण को अपने ज्ञान और परिस्थितियों की स्वयं की जानकारी के आधार पर लिखा था तथा यदि उसने किसी अन्य ग्रन्थ की सहायता ली तो उसने उस ग्रन्थ का वहीं उल्लेख भी किया।

    इस कारण, आधुनिक इतिहासकार उसके विवरण को पर्याप्त सत्य मानते हैं। इसी कारण, रेहला को एक उपयोगी ऐतिहासिक स्त्रोत ग्रन्थ स्वीकार किया गया ।

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