आयए उत्पादन और रोजगार के शास्त्रीय और कीनेसियन सिद्धांत की तुलना और तुलना करें।

    प्रश्नकर्ता Current Affrays
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    उत्तरकर्ता Quizzer Jivtara
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    एक अर्थशास्त्री के रूप में केन्स ने अपना जीवन कालसिद्ध अर्थशास्त्र की परम्परा में ही प्रारम्भ किया था। फिर भी केन्सीय अर्थशास्त्र कालसिद्ध अर्थशास्त्र का ही एक विकसित और परिष्कृत रूप नहीं है। केस के अनुसार काल सिद्ध अर्थशास्त्र रिकार्डो (David Ricardo) के समय से पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आने वाले परम्परागत अथवा शास्त्रीय आर्थिक सिद्धांतों का समूह है। यद्यपि बहुत से अर्थशास्त्रियों ने समय-समय पर इसे विस्तृत तथा संशोधित किया तथापि कालसिद्ध अर्थशास्त्र का मूल रूप-ढाँचा ज्यों-का-त्यों बना रहा। ये सिद्धात अपने आप में ही एक स्पष्ट आर्थिक विचारधारा प्रस्तुत करते हैं। परन्तु केन्स तथा कालसिद्ध अर्थशास्त्रियों के रोजगार सिद्धान्त में कुछ महत्त्वपूर्ण मौलिक अन्तर हैं :
    1. दृष्टिकोण में अन्तर-कालसिद्ध अर्थशास्त्रियों का दृष्टिकोण व्यष्टिमूलक (micro) रहा है। वह विकार-धारा एक उद्योग या एक क्षेत्र में बेरोजगारी से सम्बाधित रही है और वह मजदूरी घटा कर बेरोजगारी को कम करने का सुझाव देती है । केन्स की विचार-धारा सम्पूर्ण समाज, सम्पूर्ण आर्थिक क्षेत्र, कुल मांग, कुल पूत्ति आदि समष्टि मूलक (macro) तत्त्वों पर आधारित है। इस दृष्टि से केन्स का सिद्धांत अधिक व्यावहारिक तथा व्यापक है।

    2. पूर्ण रोजगार सम्बन्धी धारणा में अन्तर-कालसिद्ध अर्थशास्त्री पूर्ण रोजगार को एक स्वाभाविक स्थिति मानते हैं। उनकी सान्यता थी कि यदि सरकार आर्थिक मामलों में हस्तक्षेप न करे तो पूर्ण रोजगार को स्थिति अपने आप स्थापित हो जाती है। केन्स के विचार में पूर्ण रोजगार की स्थिति केवल एक काल्पनिक स्थिति है और पूजीवादी व्यवस्था में बेरोजगारी सर्वथा स्वाभाविक है। केन्स बेरोजगारी समाप्त करने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की सिफारिश करते हैं।

    3. मजदूरी की दर और रोजगार के बीच सम्बन्ध के प्रति दृष्टिकोण में अन्तर- कालसिद्ध अर्थशास्त्रियों की मान्यता थी कि मजदूरी की दरों को घटा कर सभी व्यक्तियों को रोजगार दिया जा सकता है। केन्स की मान्यता है कि यदि सामान्य मजदूरी की दरों में कमी कर दी जायगी तो समाज के पास क्रय-शक्ति कम हो जायगी। इससे प्रभावी मांग घटेगी और रोजगार में और भी गिरावट आयगी।

    4. स्फोति सम्बन्धी दृष्टिकोण में अन्नर – कालसिद्ध अर्थशास्त्रियों ने मुद्रा को किसी भी स्तर पर रोजगार या उत्पादन से जोड़ने का प्रयत्न नहीं किया । केन्स ने मन्दी काल में घाटे के बजट द्वारा रोजगार और उत्पादन वृद्धि में सहायता का समर्थन किया है।
    5. मुद्रा ओर रोजगार सम्बन्धी धारणा में अन्तर- कालसिद्ध अर्थशास्त्रियों के विचार में मृद्रा की मात्रा में वद्धि होने से वस्तुओं के मूल्य में वद्धि होती है जिससे कभी व्यक्तियों को कष्ट होता है। केन्स के विचार में मुद्रा की मात्रा सामान्य रूप में बढ़ती रहनी चाहिए। इससे उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगारी बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।
    6. लागू होने की परिस्थितियां- कालसिद्ध अर्थशास्त्रियों का सिद्धान्त केवल पूर्ण रोजगार की स्थिति में ही लागू होता है। केन्स का सिद्धान्त सभी परिस्थितियों में लागू होता है। सम्भवतः इसीलिए उन्होंने अपने सिद्धांत को सामान्य सिद्धान्त (General Theory) बतलाया था।

    स्पष्टतः केन्स का रोजगार सिद्धांत अधिक व्यापक, व्यावहारिक तथा गतिशील है। यह सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रोजगारी में वद्धि करने के लिए व्यावहारिक वृद्धि करने के लिए व्यावहारिक सुझाव देता है। कालसिद्ध सिद्धांत सर्वथा काल्पनिक, अवास्तविक सिद्धांत था।

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